आज मानव अपने सर्वोच्च लक्ष्य व रचियता से बहुत दूर हो चुका है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका “अखण्ड ज्ञान” समाज ने ईश्वर सम्बन्धी व्याप्त भ्रांतियों को समाप्त करते हुए आस्तिकों व नास्तिकों को वास्तविक अध्यात्म से परिचित करवा रही है।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिव्य पत्रिका “अखंड ज्ञान” के प्रसार को जन- जन तक पहुँचाने हेतु 23 दिसंबर, 2018 को पीतमपुरा आश्रम, नई दिल्ली में “उदबोधन” विषय के तहत एक व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
संस्थान प्रतिनिधियों ने अपने व्याख्यान में विस्तार से जीवन में अखण्ड ज्ञान की महत्ता को रखा, उन्होंने ने बताया कि यह पत्रिका प्रत्येक व्यक्ति के शरीर-मन-आत्मा को पूर्ण पोषण प्रदान करते हुए समाज जागृत हेतु भूमिका निभा रही है। यह पत्रिका सफलता और संतृप्ति का मार्ग प्रदत्त करते हुए, सभी धर्मग्रंथों में समाहित दिव्य सार (ब्रह्मज्ञान) पर प्रकाश डालती है। एक प्रस्तुति द्वारा समझाया गया कि किस प्रकार अखंड ज्ञान पत्रिका समाज उत्थान हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रश्न-उत्तर सत्र ने स्वयंसेवकों के कई प्रश्नों को हल करते हुए उन्हें अधिक समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ सेवा को पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यशाला ने सेवा के दौरान स्वयंसेवकों के समक्ष आने वाली अनेक समस्याओं का समाधान प्रदान किया।
सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, कार्यशाला संचालक ने स्पष्ट रूप से समझाया कि यद्यपि व्यक्ति के सभी कर्म उसे बंधन में बांधते हैं, परन्तु सेवा वह माध्यम है जिसके द्वारा वह अपने कर्मों से मुक्त हो जाता है।
कार्यशाला का समापन, स्वयंसेवकों के निःस्वार्थ प्रयासों द्वारा जन- जन तक इस दिव्य पत्रिका “अखंड ज्ञान” के प्रसार हेतु अथक प्रयास के प्रति आभार प्रकट करते हुए किया गया। महान समाज का निर्माण तभी सम्भव हो पाता है जब हर आयु वर्ग के पुरुष और महिलाएं विचारों की शुद्धता और एक ईमानदार दृष्टिकोण के साथ मिलकर काम करते हैं। युवा स्वयंसेवकों द्वारा समाज के उत्थान की दिशा में किया गया यह एक छोटा परन्तु प्रभावशाली प्रयास है।
इस कार्यशाला के समापन पर स्वयंसेवकों ने सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के चरण कमलों में नमन अर्पित करते हुए “अखंड ज्ञान” के प्रचार सेवा में आने वाली चुनौतियों का उत्साह से सामना करने का दृढ़ संकल्प किया।
