रसोईघर का आधार- आटा, नमक, गुड़!

बूझो तो जानें- हर घर में ऐसा कौन सा कक्ष ऐसा होता है, जिस पर घर में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य निर्भर करता है?

उत्तर- रसोईघर

निःसन्देह, हर इंसान के स्वास्थ्य का रास्ता उसकी भोजनशाला से होकर गुज़रता है। स्वस्थ रहने के लिए चाहिए पौष्टिक आहार! और पौष्टिक आहार बनता है, रसोईघर में उपयोग की गई पौष्टिक खाद्य सामग्री से। तो चलिए सेहत सार की इस कड़ी में बात करते हैं उन पदार्थों की, जो रसोईघर में बनने वाले भोजन के आधारस्तम्भ हैं।
सबसे पहले बात करते हैं उस पदार्थ की, जिसके बिना भोजन की थाली अधूरी है। भारत की एक पुरानी कहावत के अनुसार यह है- रोटी। ... आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस रोटी को हम भारतीय आजकल कोई तूल नहीं देते, गरम-गरम तवे से उतरी उस गोल-गोल रोटी के विदेशी लोग कायल हैं।...रोटी के नाम पर वे खाते हैं, डबल-रोटी या पाव-रोटी। परन्तु दु:ख की बात तो यह है कि आजकल हमारे भारतीय घरों में लोग रोटी रुपी सौगात को खाना पसंद ही नहीं करते। उन्हें अच्छे लगते हैं, मैदे से बने ब्रेड, पिज़्जा और बर्गर। इन पदार्थों को खाने से मोटापा, मधुमेह और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है।

इसके विपरीत गेहूँ के आटे से स्वास्थ्य को बहुत लाभ होता है।...

नमक बिना भोजन ऐसा होता है, जैसे सुर बिना संगीत। इसलिए रसोईघर में नमक का बहुत महत्व होता है। ... जैसे-

  1. नमक शरीर में जलयोजन बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है।
  2. अच्छे पाचन के लिए पेट में उचित अम्ल स्तर का होना अत्यन्त आवश्यक है। उचित अम्ल स्तर बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।

चीनी यह ऐसी वस्तु है जो आजकल हर रसोई में होती है। किन्तु इसकी जगह किसी भी रसोई में नहीं होनी चाहिए। कारण? कारण क्या है... अगर चीनी नहीं तो फिर क्या? ये सब और नमक एवं आटे के पूर्णत: स्वास्थ्यवर्धक लाभ जानने के लिए पढ़िए सितम्बर'१५ माह की अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका...

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