क्या हम भी ले पाएँगे कोई प्रेरणा?

मात्र एक इंसान ने बीस लाख से ज़्यादा अजन्मे शिशुओं की जान बचाई। क्या हुआ? चौंक गए! पर यह बिल्कुल सच है... आस्ट्रेलिया के जेम्स क्रीस्टोफर के खून में पाया गया- Rh(D)इम्यून ग्लोब्युलिन। यह दुर्लभ एंटीबॉडी ( रोग-प्रतिकारक) है। गर्भस्थ माताओं की देह में इस एंटीबॉडी का अभाव गर्भस्थ शिशुओं को रीसस रोग से पीड़ित कर उनकी मृत्यु का कारण बनता था। जेम्स ने अपने रक्त-प्लाज़्मा को इन माताओं को दान किया और उनके शिशुओं की रक्षा की। अभी तक जेम्स हज़ार से भी ज़्यादा बार अपने रक्त-प्लाज़्मा का दान कर चुके हैं। इसके लिए उन्हें ' Man with the Golden Arm' की उपाधि से विभूषित किया गया है। साथ ही 'जीवन बीमा कम्पनी' द्वारा इनके अनमोल जीवन का दस लाख डॉलर का बीमा किया गया है।

प्रेरणा- हमारे शास्त्रों में कहा गया- परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। ' परं परोपकारार्थं यो जीवति, स जीवति' अर्थात् जो परोपकार के लिए जीता है, वही सच्चे अर्थों में जीता है। परन्तु आज संस्कृत का यह सुभाषित लुप्तप्राय हो चुका है, मानवों के मन और कर्म- दोनों से। वहीं क्रीस्टोफर जैसे लोग इसको प्राण देने के लिए ज़िन्दा मिसाल बनकर सामने आ रहे हैं। एक महान विचारक के अनुसार मानव पुरस्कारों से नहीं, निष्काम भावना से महान बनता है। हर कोई महान बन सकता है, क्योंकि हर कोई निष्काम सेवा कर सकता है। ऐसी भावना रखकर आप भी ज़िन्दगी में महान बनें।

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क्या आप जानते हैं- यदि आप लेखन या अध्ययन करते हुए किसी वार्ता को सुनते हैं, या आपके आसपास शोरगुल होता है, तो आपकी परफॉरमेंस खराब हो जाती है। सन् 1998 में, इसी तथ्य को ' ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकॉलोजी' में प्रकाशित भी किया गया। अन्वेषण बताते हैं कि ऐसे में आपकी उत्पादकता में करीब 66% गिरावट देखने को मिलती है। इस परेशानी के समाधान हेतु एक शोध किया गया। एक ऑफिस में साउंड मासकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ... कुछ घंटों बाद कार्यकर्ताओं की क्षमता मापी गई। उसमें 46% इजाफा पाया गया।

प्रेरणा- एकाग्रता व कार्य-क्षमता बढ़ाने के लिए साउंड मासकिंग तकनीक का प्रयोग करना बिल्कुल ऐसा ही है, जैसे पाँव को काँटों से बचाने के लिए पूरी धरती को चमड़े से जड़वा देना। क्या यह युक्ति तर्कसंगत और संभव है... इसे जानने के लिए अथवा अन्य प्रेरणाओं को पाने के लिए पढ़ें अप्रैल'16 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

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