पारसी मत- क्या सिर्फ अच्छाई करना पर्याप्त है?

प्रिय पाठकगणों। इस बार हम चिह्नों की चेतना स्तम्भ के अन्तर्गत पारसी सम्प्रदाय अथवा ज़रथुश्त्री मत के दो महत्त्वपूर्ण चिह्नों को जानेंगे। उनमें निहित रहस्यों को समझने का प्रयास करेंगे। किंतु उससे पहले आइए पारसी सम्प्रदाय का एक संक्षिप्त परिचय प्राप्त करते हैं।

पारसी सम्प्रदाय  विश्व के प्राचीन सम्प्रदायों में से एक है। इसकी शुरुआत आज से लगभग 4000 ईसा पूर्व प्राचीन फारस में पैगम्बर ज़रथुश्त्र के 'ईश्वरवाद' के संदेश के साथ हुई। इसी कारण इसे 'ज़रथुश्त्र संप्रदाय' भी कहा जाता है। उस काल में प्राचीन फारस ( आज का ईरान) पूर्वी यूरोप से मध्य एशिया तक फैला एक विशाल साम्राज्य था।जरथुश्त्री धर्म तत्समय फारस का राजधर्म था। कालांतर में अरबों के आक्रमण के साथ ही यह संप्रदाय लुप्त होता गया। बहुत से जरथुश्त्री मतावलंबी फारस त्यागकर समुद्र के रास्ते भारत की ओर भाग निकले। तब उन्होंने भारत के पश्चिमी तट पर शरण ली। यहाँ ये लोग 'पारसी' ( फारसी का अपभ्रंश) कहलाए और तब से इस संप्रदाय को 'पारसी संप्रदाय' कहकर संबोधित किया जाने लगा।

पारसी मत द्वैतात्मक संसार में ईश्वरवाद की पैरवी करता है। इस एक ईश्वर को पारसी भाषा में 'अहुरा मज़्दा' कहा जाता है, अर्थात् 'महान जीवन दाता'। पारसी संप्रदाय के अनुसार विश्व में दो विपरीत शक्तियाँ 'स्पेंता मैन्यु' ( सकारात्मक शक्ति) और 'अंगिरा मैन्यु' ( नकारात्मक शक्ति) के बीज में निरंतर संघर्ष चलता रहता है। मानव को इन दोनों के बीच में से सकारात्मक ऊर्जा का चयन कर नकारात्मकता का अंत करना है। यही उसके जीवन का उद्देश्य है। पारसियों का प्राचीन ग्रंथ 'अवेस्ता' है, जिसमें पैगम्बर ज़रथुश्त्र की शिक्षाएँ लिपिबद्ध हैं।


प्रतीक चिह्न- फरवहर

पारसी संप्रदाय का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रतीक चिह्न है- फरवहर (faravahar)। इसमें दो फैले हुए पंखों के बीच एक मानवीय आकृति को दिखाया गया है। पारसी मत का यह प्रतीक चिह्न लगभग 4000 वर्ष पुराना माना जाता है।, जिसका मूल रूप प्राचीन मिस्र व सीरियाई सभ्यताओं में भी देखने को मिलता है। यह चिह्न प्राचीन पारसी मंदिरों में व्यापक रूप से चित्रित दिखाई देता है। यहाँ तक कि 1940 के दशक तक यह प्रतीक चिह्न ईरान के राष्ट्रीय बैंक ( National Bank of Iran) की मुख्य इमारत पर भी अंकित था। जितना यह चिह्न देखने में अद्भुत लगता है, उससे कहीं अधिक अद्भुत इसमें छिपे रहस्य हैं।...

परत-दर-परत उन रहस्यों को जानने के लिए पढ़िए मार्च'19 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

Need to read such articles? Subscribe Today