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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की समग्र शिक्षा पहल मंथन- संपूर्ण विकास केंद्र द्वारा संचालित संस्कारशाला एक मासिक, मूल्य-केन्द्रित उपक्रम है, जो 4 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए एक सार्थक और समृद्ध मंच प्रदान करता है। अनुभवात्मक शिक्षण और नैतिक आधार के सुंदर समन्वय से संस्कारशाला बालमन को केवल ज्ञान से नहीं, अपितु जीवनोपयोगी विवेक से समृद्ध कर रही है।

76 Nationwide Sanskarshalas Reinforce the Power of Knowledge Rooted in Values | Vidya Sanskarshala

इस वर्ष संस्कारशाला की वार्षिक थीम “धर्म के दस लक्षण” पर आधारित है। इसी क्रम में नवंबर 2025 का विषय रहा विद्या संस्कारशाला- अष्ट धर्म लक्षणम्, जिसमें विद्या को धर्म का आठवाँ लक्षण मानते हुए उसके परिवर्तनकारी स्वरूप को रेखांकित किया गया। इन सत्रों के माध्यम से बच्चों को यह समझने का अवसर मिला कि सच्ची विद्या विचारों में स्पष्टता लाती है, चरित्र को सुदृढ़ करती है और जीवन को उद्देश्यपूर्ण दिशा प्रदान करती है।

नवंबर 2025 में देशभर की DJJS शाखाओं में कुल 76 विद्या संस्कारशाला कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनसे लगभग 6,045 बच्चे लाभान्वित हुए। इनमें NRI बच्चे तथा देश के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी भी सम्मिलित रहे।

76 Nationwide Sanskarshalas Reinforce the Power of Knowledge Rooted in Values | Vidya Sanskarshala

1. असम

  • श्री दुर्गा मंदिर प्राथमिक विद्यालय, डिब्रूगढ़
     

2. हरियाणा

  • यूरो इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर–10, गुरुग्राम
     

3. महाराष्ट्र

  • संत ज्ञानेश्वर प्राथमिक विद्यालय, सालेभाटा
     
  • जिला परिषद (ZP) प्राथमिक विद्यालय, साउंडद
     
  • शासकीय प्राथमिक विद्यालय, मानेगांव
     

4. उत्तर प्रदेश

  • प्राथमिक विद्यालय, दिहवा नगरा — बलिया
     
  • किंडर गार्डन प्ले स्कूल, प्रतिभा कॉलोनी — अलीगढ़
     
  • सरस्वती शिशु मंदिर, कसेरू खेड़ा — मेरठ
     
  • कन्या संयुक्त विद्यालय, रेवतीपुर — गाजीपुर
     
  • आर. एन. आर. इंटरनेशनल स्कूल, रेवतीपुर — गाजीपुर
     
  • माँ भगवती पब्लिक स्कूल, रेवतीपुर — गाजीपुर
     
  • शिवा कॉन्वेंट स्कूल, संतपुरा — गोविंदपुरी
     
  • नवयुवक स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज, मैनपुर — गाजीपुर
     
  • प्राथमिक विद्यालय, शाहगढ़ — अलीगढ़
     
  • जीएसएएस अकादमी, हर्रैया — बस्ती
     

इस माह की विद्या संस्कारशाला- अष्ट धर्म लक्षणम् मंथन की समस्त गतिविधियों का केंद्रीय आधार रही। मंथन कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित इन सत्रों का उद्देश्य बच्चों में विद्या के उस स्वरूप को जाग्रत करना था, जो औपचारिक शिक्षा से आगे बढ़कर जीवन-मूल्यों और चरित्र निर्माण से जुड़ता है।

आरंभ में बच्चों को एक महत्वपूर्ण भेद पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया- शैक्षणिक उपाधियों और सच्ची विद्या के अंतर पर। इन चर्चाओं ने यह प्रश्न उभारा कि वास्तव में शिक्षित होना क्या है। इस संवादात्मक प्रक्रिया ने बच्चों की चिंतन-क्षमता को सक्रिय किया, उनकी सहभागिता को सशक्त बनाया और उन्हें सुनी हुई बातों को यथावत स्वीकार करने के स्थान पर अपने विवेक से समझने, आत्मसात करने तथा जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया।

 इसके पश्चात् एक प्रभावशाली वीडियो सत्र के माध्यम से यह दर्शाया गया कि बच्चे केवल सफल होने की नहीं, बल्कि अच्छा मनुष्य बनने की आकांक्षा के साथ आगे बढ़ते हैं। सत्रों में यह भी रेखांकित किया गया कि यदि शिक्षा नैतिक आधार से रहित हो, तो वह व्यक्ति को भटका सकती है और सामाजिक क्षति का कारण बन सकती है।

रोचक इंटरएक्टिव क्विज़ सत्रों ने इन विचारों को बच्चों के भीतर सहज रूप से स्थापित किया। कार्यक्रम का समापन शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित एक प्रेरक चिंतन के साथ हुआ, जिसमें यह समझाया गया कि ब्रह्मज्ञान आधारित पूर्ण गुरु द्वारा प्राप्त होने वाला ज्ञान- ही वह परम विद्या है जो मानव जीवन को श्रेष्ठ आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़कर जीवन को सच्चे ध्येय से जोड़ती है।

अंत में, शांति मंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ सत्रों का समापन हुआ। सभी ने दिव्य गुरु श्री अशुतोष महाराज जी के पावन कमल-चरणों में श्रद्धापूर्वक प्रणाम अर्पित किया। उनकी करुणा और दिव्य मार्गदर्शन से इस माह का विषय- विद्या संस्कारशाला- अष्ट धर्म लक्षणम्- बच्चों के विचार, आचरण और अंतःचेतना में जीवंत रूप से अभिव्यक्त हुआ।

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