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दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य कृपा से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा लुधियाना, पंजाब में 22 दिसम्बर 2025 को “संकल्प” नामक भजन संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन सभी जिज्ञासुओं के समक्ष परम सत्य को प्रकट करना रहा, जो भक्ति के सच्चे स्रोत की खोज कर रहे हैं। इस संगीतमय आयोजन में उपस्थित असंख्य श्रद्धालुओं ने अलौकिक आनंद की अनुभूति की। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान के चरण कमलों में भावपूर्ण प्रार्थना के साथ हुआ, जिसमें सभी के कल्याण, हृदय की पवित्रता व आध्यात्मिक यात्रा के उत्थान की कामना निहित थी।

A Divine Devotional Concert offered a sacred Musical Journey of Inner-Awakening in Ludhiana, Punjab

डीजेजेएस प्रतिनिधि व प्रमुख वक्ता, साध्वी वैष्णवी भारती जी ने समझाया कि किस प्रकार प्रभु के चरणों में समर्पित प्रार्थनापूर्ण हृदय सदैव उनके दिव्य संरक्षण में रहता है। शास्त्रों से उदाहरणों को उद्धृत करते हुए उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षाओं को जीवन के व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जोड़ा। जिन्हें आज के आधुनिक व वैज्ञानिक युग के भक्त भी आसानी से अपना सकते हैं।

जिस प्रकार संगीत सीखने के लिए संगीत के उस्ताद की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार ‘जीवन’ जीने की कला सीखने के लिए एक आध्यात्मिक गुरु का होना अनिवार्य है। शास्त्रों के वचनों व प्राचीन प्रसंगों के आधार पर, डीजेजेएस प्रतिनिधि ने जीवन में एक तत्ववेत्ता गुरु की अनिवार्य उपस्थिति के महत्व को पुष्ट किया। इतिहास भी हमें सिखाता है कि स्वामी विवेकानंद, चन्द्रगुप्त मौर्य और अर्जुन जैसे शिष्यों को अपने जीवन में सफलता तभी प्राप्त हुई जब उन्हें श्रीरामकृष्ण परमहंस, चाणक्य व भगवान श्री कृष्ण जैसे पूर्ण गुरुओं का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

A Divine Devotional Concert offered a sacred Musical Journey of Inner-Awakening in Ludhiana, Punjab

एक पूर्ण गुरु का आगमन शिष्य के जीवन में परिवर्तनकारी हुआ करता है। पूर्ण गुरु शिष्य को ब्रह्मज्ञान प्रदान कर उसके तृतीय नेत्र (आज्ञा चक्र) को जागृत कर देते हैं। शास्त्रों में इस विधि को आत्म-साक्षात्कार के रूप में जाना गया है, जिसका अर्थ है अपने घट भीतर ईश्वर का दर्शन कर लेना। जी हाँ, यह आज भी संभव है! गुरु कृपा से अपने घट के भीतर ईश्वर का दर्शन कर लेना ही हमें सच्ची भक्ति की ओर अग्रसर करता है। यह दिव्यातिदिव्य घटना कोई क्षणिक कल्पना या कोरी मान्यता तक सीमित नहीं है अपितु यह तो प्रत्यक्ष अनुभूति व अटूट विश्वास पर आधारित होती है।

अर्थपूर्ण भावों से परिपूर्ण भजनों की शृंखला ने श्रोताओं के हृदय को स्पर्श कर कार्यक्रम के साथ बाँधे भी रखा और उन्हें झूमने पर भी विवश किया। भजनों के मध्य प्रस्तुत लघु प्रवचनों ने शास्त्रों में निहित दिव्य ज्ञान को स्पष्ट किया। मधुर संगीत व दिव्य प्रेरणाओं के संगम के रूप में प्रस्तुत यह कार्यक्रम उपस्थित श्रद्धालुओं के मन व हृदय में गहराई तक उतरने में सफल रहा, जिससे उन्होंने अपने अंतर में अति विशेष आनंद का अनुभव किया। विभिन्न समाचार पत्रों व डिजिटल मीडिया द्वारा कार्यक्रम का व्यापक रूप से उल्लेख किया गया। उपस्थित गणमान्य अतिथि व श्रद्धालुजन भक्ति की इस आनंदमयी वर्षा व ईश्वर दर्शन के परम लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पना से प्रफुल्लित दिखे व डीजेजेएस के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की।

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