दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 27 फरवरी 2026 को ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में “शिव शक्ति” नामक एक भक्तिपूर्ण कार्यक्रम का दिव्य आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा की गूंज हर ओर सुनाई दी। इस पावन अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और जिज्ञासु एकत्रित हुए और भगवान शिव की शाश्वत महिमा तथा शिक्षाओं में निमग्न हुए।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौराणिक प्रसंगों का वर्णन करना नहीं था, बल्कि लोगों की आंतरिक चेतना को जागृत करना और उन्हें धर्म, वैराग्य तथा आत्म-अनुशासन के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना था। इस पहल के माध्यम से डीजेजेएस ने महादेव द्वारा स्थापित सनातन मूल्यों को पुनर्जीवित करने और समाज को सत्य, संतुलन तथा आध्यात्मिक जागरूकता से युक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का ओजस्वी एवं प्रभावशाली वर्णन दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य डॉ. सर्वेश्वर जी द्वारा किया गया। अपने प्रेरणादायक प्रवचनों के माध्यम से उन्होंने शिव महापुराण तथा अन्य पवित्र शास्त्रों में वर्णित भगवान शिव के गूढ़ महत्व को अत्यंत सुंदर ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव केवल बाहरी रूप से पूजे जाने वाले देवता मात्र नहीं हैं, बल्कि वे उस सर्वोच्च चेतना का प्रतीक हैं जो प्रत्येक प्राणी के भीतर विद्यमान है।

उन्होंने शिव को आदियोगी, परम वैराग्य, करुणा और दिव्य शक्ति के प्रतिरूप के रूप में प्रस्तुत किया। उनके तीसरे नेत्र के प्रतीक से लेकर जटाओं से प्रवाहित गंगा तक, भगवान शिव के प्रत्येक स्वरूप में गहरा आध्यात्मिक अर्थ छुपा है। उनका जीवन मानवता को यह सिखाता है कि अराजकता के बीच भी शांत कैसे रहा जाए, आंतरिक नकारात्मकता का नाश कैसे किया जाए और सरलता व सजगता के साथ जीवन कैसे जिया जाए। भगवान शिव की शिक्षाएँ साधकों का मार्गदर्शन करती हैं कि वे अहंकार पर विजय प्राप्त करें, इच्छाओं को नियंत्रित करें और जीवन के उच्चतम उद्देश्य को जानें।
डॉ. सर्वेश्वर जी ने भगवान शिव की शिक्षाओं को ब्रह्मज्ञान के शाश्वत विज्ञान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यद्यपि शास्त्र शिव की महिमा का वर्णन करते हैं, परंतु वास्तविक अनुभूति तभी संभव है जब व्यक्ति उसे अपने भीतर अनुभव करे। आज की वेगवान और दिशाहीन जीवनशैली में लोग अक्सर बाहरी संसार में शांति खोजते हैं, लेकिन भीतर अशांत रहते हैं। भगवान शिव द्वारा दिखाया गया मार्ग तब सार्थक होता है जब दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी जैसे वर्तमान समय के पूर्ण गुरु साधक को ब्रह्मज्ञान का वरदान देकर उसकी आंतरिक दृष्टि को खोल दें। इससे साधक अपने भीतर विद्यमान दिव्य प्रकाश का अनुभव कर सकता है। इसी आंतरिक प्रकाश पर ध्यान के माध्यम से आत्मबोध और सच्ची भक्ति की यात्रा प्रारंभ होती है।
उन्होंने आगे यह समझाया कि ब्रह्मज्ञान भक्ति को कर्मकांड से उठाकर वास्तविक अनुभूति में परिवर्तित कर देता है। पूर्ण गुरु की मार्गदर्शिता में किया गया ध्यान भगवान शिव को भीतर अनुभव करने का साधन बन जाता है, जिससे साधक को जीवन में स्पष्टता, स्थिरता और आध्यात्मिक तृप्ति मिलती है। इस प्रकार भगवान शिव का सार केवल समझा ही नहीं जाता, बल्कि जीवन में उतारा भी जा सकता है।
इस आयोजन में कई सम्मानित अतिथियों, सामुदायिक नेताओं और विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनकी सहभागिता ने इस कार्यक्रम को विशेष महत्व और प्रोत्साहन प्रदान किया। अनेक श्रद्धालुओं ने अपने हृदयस्पर्शी अनुभव साझा करते हुए अपने अंतर्मन की शांति और नए उद्देश्य की अनुभूति व्यक्त की तथा ध्यान और भक्ति के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखने की इच्छा जताई।
शिव शक्ति कार्यक्रम मात्र एक धार्मिक सभा न रहकर, असंख्य व्यक्तियों का आत्म-जागरण और दिव्य साक्षात्कार की राह पर मार्गदर्शन करने वाला एक सशक्त उत्प्रेरक सिद्ध हुआ।