दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की अनुपम कृपा से 28 दिसंबर 2025 से 3 जनवरी 2026 तक डूंगरपुर, राजस्थान में सात दिवसीय भगवान शिव कथा का भव्य आयोजन किया गया। इस कथा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को उस शाश्वत दिव्य मार्ग पर ले जाना था, जो आत्म-जागरण से प्रारंभ होकर परम मोक्ष तक पहुँचाता है। कथा का शुभारंभ ब्रह्मज्ञानी वेदपाठी विद्वानों द्वारा रुद्रीपाठ एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ, जिसने इस आध्यात्मिक आयोजन को मंगलमय आरंभ प्रदान किया।

कथा व्यास साध्वी गरिमा भारती जी ने भगवान शिव के महत्व को अत्यंत सुंदर एवं प्रभावशाली ढंग से प्रतिपादित किया। भगवान शिव आदि योगी एवं वास्तविक गुरु हैं, जिनसे योग और आध्यात्मिक ज्ञान की धारा प्रवाहित होती है। इस दिव्य कथा ने जहाँ आत्मा (स्व) और मोक्ष (मुक्ति) के सनातन रहस्य का उद्घाटन किया वहीं प्राणी में विनम्रता और समर्पण की भावना को जागृत करने का ज्ञान भी प्रकट किया, जो जिज्ञासुओं को अज्ञान से ज्ञान की ओर मार्गदर्शित कर उनमें ‘मैं’ और ‘मेरा’ का मिथ्या भाव विलीन कर देता है|
शिव शुद्ध चैतन्य का प्रतीक हैं। शिव संहारक हैं, परन्तु संसार के नहीं, अपितु अविद्या (अज्ञान) और अहंकार के। यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि शिव केवल पूजनीय देवता ही नहीं, बल्कि हमारे भीतर विद्यमान दिव्य चेतना हैं, जिन्हें देखा और अनुभव किया जा सकता है।

साध्वी जी ने शास्त्रों के विभिन्न उदाहरणों का उल्लेख करते हुए विस्तार से समझाया कि जिस प्रकार ऋषि-मुनियों और संतों ने शिव को अंतर्घट में देखा, उसी प्रकार प्रत्येक साधक भी उनके दिव्य स्वरूप को अपने भीतर प्रत्यक्ष देख सकता है। उन्होंने ब्रह्मज्ञान की उस शाश्वत विधि का उद्घाटन किया, जिसके माध्यम से एक पूर्ण गुरु साधक के तृतीय नेत्र (आज्ञा चक्र) को जागृत करते हैं और साधक अपनी आत्मा में परमात्मा का साक्षात्कार करता है। गुरु गीता में भगवान शिव स्वयं माता पार्वती को यह गूढ़ सत्य बताते हैं कि- “कोई व्यक्ति तीर्थों में भटक सकता है, किंतु पूर्ण गुरु द्वारा मिले आत्म-ज्ञान के बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती।”
तृतीय नेत्र (आज्ञा चक्र) के जागरण से आंतरिक रूपांतरण, समस्त नकारात्मक विकारों और कर्मों का क्षय होता है, मन और विचारों की शुद्धि होती है तथा अंततः अंतरात्मा में शाश्वत शांति और परम आनंद की स्थापना होती है। और यह सब केवल पूर्ण गुरु की कृपा से ही संभव होता है।
श्रद्धालुओं ने इस कथा को भगवान शिव तक पहुँचने के एक आध्यात्मिक मार्गदर्शन के रूप में माना। कोई दिव्यता से अभिभूत हुआ, कुछ ने दिव्य ज्ञान की प्राप्ति को अपना ध्येय बनाया, किसी को आत्मबोध का अनुभव हुआ तो किसी ने आध्यात्मिक विषयों पर आगे संवाद की इच्छा प्रकट की। भक्तिमय भजनों ने श्रोताओं को जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आयोजन को कई प्रिंट मीडिया ने कवर किया। श्रोताओं ने डीजेजेएस और उनके प्रतिनिधियों के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया।