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मंथन–संपूर्ण विकास केंद्र, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की समग्र शिक्षा पहल के अंतर्गत, बच्चों में बुद्धि, मूल्य और अंतःचेतना के संवर्धन हेतु निरंतर प्रतिबद्ध है। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की प्रबुद्ध दृष्टि से प्रेरित यह प्रयास मूल्य-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम और चरित्र निर्माण को एकीकृत करते हुए सजग, उत्तरदायी व्यक्तित्वों का निर्माण कर रहा है।

Blending Values with Technology: Manthan SVK’s November Chronicle | November 2025 | DJJS Manthan SVK

मासिक कार्यक्रमों के अंतर्गत, मंथन सम्पूर्ण विकास केंद्र - शिक्षा, संस्कृति और सर्वांगीण विकास से जुड़ी विविध गतिविधियाँ आयोजित करता है। नवंबर 2025 में, देशभर की DJJS शाखाओं में आयोजित सुविचारित ऑनलाइन व ऑफलाइन सत्रों के माध्यम से 1850 से अधिक विद्यार्थियों तक सार्थक पहुँच बनी। इस माह संपन्न प्रमुख कार्यशालाएँ एवं पहलें निम्नलिखित रहीं-

• विद्या संस्कारशाला
इस वर्ष की वार्षिक थीम “धर्म के दस लक्षण” के अंतर्गत आयोजित विद्या संस्कारशाला (आठवाँ धर्म-लक्षण) में मंथन कार्यकर्ताओं ने सच्चे ज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति पर केंद्रित सत्र संचालित किए। बच्चों ने जाना कि विद्या सूचना से आगे बढ़कर बुद्धि का परिष्कार करती है, मूल्यों को सुदृढ़ बनाती है और कर्म को सही दिशा देती है। इन सत्रों ने सीख को जीवन-व्यवहार और भविष्य के निर्णयों में विवेकपूर्ण ढंग से अपनाने के लिए प्रेरित किया।

Blending Values with Technology: Manthan SVK’s November Chronicle | November 2025 | DJJS Manthan SVK

• अलंकृता- दीवाली श्रीराम वाली
अलंकृता का यह आयोजन भक्ति, मूल्यों और सांस्कृतिक गौरव की जीवंत अभिव्यक्ति रहा। रचनात्मक प्रस्तुतियों और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से श्रीराम के आदर्श- धर्म, साहस और करुणा- को उजागर किया गया। विद्यार्थियों ने उत्सव के आनंद के साथ नैतिक शिक्षा को भी आत्मसात किया, जिससे परंपरा के प्रति श्रद्धा, एकता और सकारात्मक मनन का भाव पुष्ट हुआ।

• SUPW- स्वास्थ्य एवं कल्याण
 SUPW के अंतर्गत स्वास्थ्य व कल्याण पर केंद्रित गतिविधियों द्वारा स्वस्थ आदतों, स्वच्छता और समग्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित की गई। सहभागितापूर्ण अभ्यासों ने शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को रेखांकित किया, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य के अनुरूप जीवन-शैली को प्रोत्साहन मिला।

• भारत गौरव गाथा- आओ करें भारत की सैर : मुरुडेश्वर
 मुरुडेश्वर की पावन भूमि के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अर्थपूर्ण अन्वेषण कराया गया। इतिहास, भक्ति और जीवन-अनुभव को जोड़ते इस सत्र ने राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक बोध को सुदृढ़ किया, जिससे विद्यार्थियों में सभ्यतागत मूल्यों के प्रति नई सराहना जगी।

• ए.आई एकीकरण कार्यशाला (शिक्षक व कार्यकर्ता)
 मंथन SVK ने शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं हेतु जेमिनी आधारित उन्नत अनुप्रयोगों पर एक कार्यशाला आयोजित की। ए.आई के उपयोग के माध्यम से शिक्षण-प्रभावशीलता, सामग्री-सृजन और डिजिटल दक्षता को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया, ताकि शिक्षा का मानवीय और मूल्य-केंद्रित स्वर सुरक्षित रहे।

• जन्मदिन समारोह
मंथन - सम्पूर्ण विकास केंद्र में प्रायोजकों द्वारा जन्मदिन आदि मनाए गए। इन अवसरों ने भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ाया, जिससे प्रत्येक बच्चा स्वयं को मूल्यवान और स्नेहपूर्ण समुदाय का हिस्सा अनुभव कर सका।

• बाल दिवस उत्सव
बाल्यावस्था की मासूमियत, जिज्ञासा और असीम संभावनाओं का उत्सव- बाल दिवस मनाया गया। आनंदपूर्ण गतिविधियों और अर्थपूर्ण संवादों के माध्यम से बच्चों ने इस दिवस के महत्व को जाना। साथ ही इस उत्सव में बच्चों ने अपने-अपने केंद्रों में कविताएँ, कहानियाँ व अन्य प्रस्तुतियाँ प्रस्तुत की।

• आयरन औषधि वितरण
आयरन औषधियों का वितरण कर बच्चों के स्वास्थ्य और सम्पूर्ण विकास को समर्थन दिया गया। इस पहल के मध्यम से चिकित्सक द्वारा बच्चों की जांच भी हुई व उन्हें आयरन से भरपूर सब्जियां खाने की सलाह दी गई।

• कला एवं शिल्प
कला एवं शिल्प सत्रों ने कल्पनाशीलता, अभिव्यक्ति और सूक्ष्म हस्त-कौशल के विकास हेतु सृजनात्मक मंच प्रदान किया। हस्तकौशल से एकाग्रता और सौंदर्य-बोध बढ़ा, साथ ही मौलिकता, आत्मविश्वास और सीखने का आनंद भी सुदृढ़ हुआ।

• मुख्यालय (HO) दल का केंद्र भ्रमण
मुख्यालय दल के केंद्र-भ्रमण ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से प्रत्यक्ष संवाद का अवसर दिया। मुख्यालय (HO) दल के केंद्र भ्रमण का उद्देश्य मंथन–संपूर्ण विकास केंद्र की मूल विचारधारा को और अधिक सुदृढ़ करना, उसके सम्यक् क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना तथा सभी केंद्रों में समान दृष्टि, दिशा और गुणवत्ता को सशक्त रूप से स्थापित करना रहा।

• विज्ञान के साथ आनंद
सरल प्रयोगों और सहभागितापूर्ण प्रदर्शनों द्वारा वैज्ञानिक अवधारणाएँ रोचक ढंग से प्रस्तुत की गईं। जिज्ञासा, तार्किक चिंतन की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला, जिससे विज्ञान का अध्ययन अधिक आनंददायक और व्यवहारिक बना।

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