दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से 12 अक्टूबर 2025 को रेवाड़ी, हरियाणा में एक भजन संध्या का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भक्ति संगीत और प्रेरक प्रवचनों का अद्भुत संगम रहा, जिसने वहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदयों को गहराई तक स्पर्श किया। "ईश्वर को देखा जा सकता है" और "वैश्विक शांति" की प्राप्ति प्रभु से शाश्वत व सूक्ष्म संबंध स्थापित कर ही की जा सकती है, कार्यक्रम के केंद्र बिंदु रहे।

कार्यक्रम की वक्ता साध्वी शैब्या भारती जी ने अपने प्रवचनों द्वारा स्पष्ट किया कि वैश्विक शांति केवल ब्रह्मज्ञान जैसे प्राचीन विज्ञान के माध्यम से ही संभव है। साथ ही, भारत, जिसे कभी जगतगुरु कहा जाता था, ने विश्व की सीमाओं से परे शांति का संदेश फैलाने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया था।
उन्होंने 'ब्रह्मज्ञान' की उस दिव्य प्रक्रिया के सिद्धांत को विस्तार से समझाया, जिसे केवल एक परिपूर्ण सद्गुरु की सर्वोच्च कृपा से ही पाया जा सकता है। ब्रह्मज्ञान वह परम ज्ञान है जिसके माध्यम से साधक प्रत्यक्ष तत्व-दर्शन कर सकता है और परमात्मा के अनाहत संगीत से जुड़ सकता है। 'दिव्य ज्ञान' पर आधारित सतत ध्यान के माध्यम से मानव उस अव्यक्त नाम से स्वयं को जोड़, जीवन के उच्च उद्देश्य की यात्रा आरंभ कर सकता है। जैसे अर्जुन ने कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में भी अंतरात्मा में वही दिव्य नाम साधे रखा, वैसे ही हम भी सांसारिक कर्तव्यों निभाते हुए प्रभु के नाम से जुड़े रह सकते हैं और सच्चे अर्थों में सफल हो सकते हैं।

साध्वी जी ने कहा कि केवल पूर्ण गुरु ही इस दिव्य ज्ञान में दीक्षित कर सकते हैं और वर्तमान समय में परम पूज्य श्री आशुतोष महाराज जी ऐसे ही युगपुरुष हैं, जो ब्रह्मज्ञान की विधि से परमात्मा का प्रत्यक्ष अनुभव करवाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान साध्वी जी ने डीजेजेएस द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक प्रकल्पों जैसे- मंथन (अभावग्रस्त बच्चों के लिए समग्र शिक्षा कार्यक्रम), बोध (नशा मुक्ति एवं उन्मूलन कार्यक्रम) आदि के बारे में भी बताया, जो सामूहिक रूप से सम्पूर्ण सामाजिक सुधार की दिशा में कार्यरत हैं। उपस्थित श्रद्धालुओं ने संस्थान के इन प्रयासों की सराहना करते हुए, श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे संस्थान के स्वयंसेवकों और प्रचारकों के अथक प्रयासों की प्रशंसा की।
कुल मिलाकर कार्यक्रम ने भक्ति व श्रद्धा के वास्तविक स्वरूप के बारे में जागरूकता उत्पन्न की, जिसके माध्यम से व्यक्ति के अंतःकरण के परिवर्तन द्वारा वैश्विक शांति लाई जा सकती है। कार्यक्रम में कई दिव्य व भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए गए, जिससे विधिवत श्रद्धालु जुड़े रहे। समस्त श्रद्धालुओं व विशिष्ट अतिथियों ने स्वस्थ समाज की दिशा में योगदान देने का संकल्प लिया, जिसमें केवल बाहरी दुनिया को बदलना ही नहीं, बल्कि अपने तन, मन और आत्मा को भी स्वस्थ व संयमित बनाना शामिल है।