प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ मेला 2025- विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन तीर्थ यात्रियों को त्रिवेणी संगम- गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम, पर अनुष्ठान करने का शुभ अवसर प्रदान कर रहा है। पवित्र कुम्भ का यह पर्व भक्तों को पावन स्नान और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए महाकुम्भ मेले में आने के लिए आमंत्रित करता है। प्रत्येक 12 वर्ष में विश्व भर से भक्त महाकुम्भ में ईश्वर का दर्शन करने व उसकी उपस्थिति को अनुभव करने के लिए आते हैं। हालाँकि, सभी धर्मग्रंथ हमारी आत्मा के भीतर स्थित ईश्वर की उपस्थिति काउद्घोष करते हैं।

भक्तों को आंतरिक दिव्य सागर में ध्यानमग्न करने हेतु, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) के श्रेष्ठ मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 21 जनवरी 2025 को महा कुम्भ मेला, प्रयागराज में भजन संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय रहा ‘भावांजली’– अर्थात भगवान के चरणकमलों में धर्म व आध्यात्मिक पथ से जुड़े रहने व समाज कल्याण हेतु भक्तिपूर्ण प्रार्थना।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए, दीप प्रज्वलन समारोह के लिए गणमान्य अतिथियों को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में असंख्य श्रद्धालुजन अपने भीतर ईश्वर दर्शन की पिपासा को तृप्त करने हेतु एकत्रित हुए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनी भक्तिपूर्ण भजनों की शृंखला, जिसने भक्त हृदयों को आध्यात्म की दिव्य गाथा से जोड़ा।

डीजेजेएस प्रतिनिधि, साध्वी शैलासा भारती जी ने बड़े सुंदर व रोचक ढंग से समझाया कि ग्रंथों के अनुसार ईश्वर हम सब के भीतर विद्यमान है और हमें उन्हें अपने भीतर खोजने का प्रयास करना चाहिए। पूर्ण गुरु की कृपा से अपने भीतर ईश्वर का दर्शन करना संभव है। ब्रह्मज्ञान वह सनातन प्रक्रिया है जिसमें पूर्ण गुरु अपने शिष्य के मस्तक पर कृपा हस्त रख उसके आज्ञा चक्र को सक्रिय कर देते हैं, अर्थात उसके तृतीय नेत्र को जागृत कर देते हैं, तबशिष्य अपनी आत्मा के भीतर ही ईश्वर का दर्शन करता है। जिस प्रकार ‘त्रिवेणी संगम’ गंगा, यमुना व सरस्वती नदियों का संगम है उसी प्रकार आज्ञा चक्र भी इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना नाड़ियों (3 ऊर्जा प्रणालियों) का संगम है, जो जीवन शक्ति की आपूर्ति के लिए उत्तरदायी होती हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) ब्रह्मज्ञान की इसी शाश्वत विधि को प्रदानकरने हेतु प्रतिबद्ध है, जो तन, मन व आत्मा की वास्तविक आध्यात्मिक शुद्धि की ओर ले जाती है और भक्तों को आंतरिक दिव्य महासागर में ध्यानमग्न कर ईश्वर से जोड़ती है।
उपस्थित श्रद्धालु व गणमान्य अतिथिगण संस्थान की आध्यात्मिक ज्ञान, डीजेजेएस के लक्ष्य और उसके निमित्त प्रत्येक कार्यकर्त्ता, प्रचारक व प्रतिनिधि की निःस्वार्थ सेवा को देखकर आश्चर्यचकित व मंत्रमुग्ध हुए। अतः डीजेजेएस के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करते हुए उन्होंने संस्थान के सामाजिक व आध्यात्मिक प्रकल्पों में योगदान हेतु अपनी गहन रुचि दिखाई।