14 से 20 अप्रैल 2026 तक, आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण होशियारपुर, पंजाब में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा अत्यंत प्रेरणादायक सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया। इस कथा का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को जीवन में पूर्ण गुरु की आवश्यकता का बोध कराना था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आध्यात्मिक जिज्ञासु इसमें सम्मिलित हुए, जो श्रीमद् भागवत की दिव्य कथाओं और गूढ़ शिक्षाओं में स्वयं को लीन करने के लिए उत्साहित थे।

इस पावन कथा का उद्देश्य श्रीमद् भागवत पुराण में वर्णित भक्ति, धर्म और निस्वार्थ जीवन जैसे शाश्वत मूल्यों को पुनर्जीवित करना था। कथा ने श्रोताओं को करुणा, आस्था और आध्यात्मिक जागरूकता से युक्त संतुलित जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस पहल के माध्यम से डीजेजेएस ने श्रद्धालुओं के भीतर आंतरिक परिवर्तन जगाने और उन्हें भक्ति व उच्च चेतना के मार्ग पर अग्रसर करने का प्रयास किया, ताकि व्यक्तिगत शांति और समाज में सद्भाव को बढ़ाया जा सके।
कथा का ओजस्वी और मधुर वाचन दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी वैष्णवी भारती जी ने किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं के महत्त्व के साथ-साथ प्रह्लाद और ध्रुव जैसे भक्तों की प्रेरणादायक कथाओं को साझा किया। साध्वी जी ने समझाया कि श्रीमद् भागवत कथा केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक गूढ़ आध्यात्मिक मार्गदर्शिका है, जो मानवता को समर्पण, प्रेम और धर्म के मूल्य सिखाती है। उन्होंने यह भी बताया कि ये शिक्षाएँ आधुनिक समय में भी प्रासंगिक हैं, जो व्यक्तियों को जीवन की चुनौतियों से पार पाने और उद्देश्यपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण तथा आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जीवन जीने का मार्ग दिखाती हैं।

साध्वी जी ने इन शिक्षाओं को ब्रह्मज्ञान के गूढ़ सिद्धांत से जोड़ा, जो आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से हृदय में भक्ति का संचार होता है, किन्तु भक्ति का आरंभ आत्मिक-जागृति से होता है। जीवन में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब पूर्ण गुरु साधकों को ब्रह्मज्ञान से लाभान्वित करते हैं। इस शाश्वत ज्ञान विधि के द्वारा ही व्यक्ति अपने भीतर के दिव्य प्रकाश पर ध्यान करना सीखता है और भक्ति की यात्रा आरंभ करता है।
आज की तीव्रगामी और दिशा-विहीन जीवन शैली में लोग प्रायः बाहरी जगत में शांति और जीवन का उद्देश्य खोजते हैं, परन्तु ब्रह्मज्ञान भीतर की शांति, स्थिरता और संतोष का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करता है। साध्वी जी ने कहा कि भक्ति तभी सार्थक होती है जब उसके साथ आंतरिक अनुभव जुड़ा हो। पूर्ण गुरु के मार्गदर्शन में ध्यान का निरंतर अभ्यास साधकों को श्रीमद् भागवत कथा की शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में आत्मसात करने में सक्षम बनाता है, जिससे वे आध्यात्मिक प्रगति, परिवर्तन और स्थायी शांति की ओर अग्रसर होते हैं।
इस आयोजन में विविध क्षेत्रों के सम्माननीय अतिथि, समाजसेवी, गणमान्य नागरिक तथा सामुदायिक प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। उनकी सहभागिता ने इस आध्यात्मिक कार्यक्रम को विशेष पहचान दिलाई और समाज के लिए इसके महत्व को रेखांकित किया। स्थानीय मीडिया ने भी कार्यक्रम को व्यापक रूप से कवर किया और इसके साकारात्मक परिवर्तन तथा आन्तरिक शांति के संदेश की सराहना की। उपस्थितजनों ने साझा किया कि कथा ने उन्हें अपनी व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा आरंभ करने और भक्ति व जागरूकता से परिपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।
होशियारपुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर, आत्म-साक्षात्कार और परिवर्तन का मंच बन गई, जिसने श्रोताओं को भक्ति, आंतरिक शांति और उच्च चेतना की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।