सावन के पावन महीने में मनाया जाने वाला तीज का पर्व एक बार फिर संपूर्ण उत्तर भारत, पश्चिमी भारत एवं नेपाल में श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। पारंपरिक रूप से झूलों, मेहंदी और लोकगीत से जुड़ा यह पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

परंतु इस प्रतीकात्मक मिलन के पीछे छुपी है अनुशासन, आत्म जागृति और परिवर्तन की वह कहानी जिसे दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में डीजेजेएस संतुलन ने अपने तीज के 2025 थीम ‘स्वयं से साक्षात्कार’ के माध्यम से सबके समक्ष प्रस्तुत किया।
संतुलन ने अपने तीज अभियान के माध्यम से तीज के वास्तविक सार को उजागर किया। तीज वह पावन दिन है जब भगवान शिव ने देवी पार्वती को उनकी दिव्य सहचारी के रूप में स्वीकार किया और उनके गुरु बन उन्हें ब्रह्मज्ञान प्रदान किया। और इसी दिन अटूट संकल्प के साथ शुरू हुई देवी पार्वती की आध्यात्मिक यात्रा जिसके साथ में गहन साधना में लीन हो गयीं।

दृढ़ अनुशासन एवं श्रद्धा के साथ ब्रह्मज्ञान की साधना कर देवी ने अपने हर तरह के विकर्षण को दूर कर अपने मन को शांत किया और धीरे-धीरे वह साधिका से शक्ति और दिव्यता के आदि स्त्रोत आदि शक्ति के रूप में परिवर्तित हो गईं।
तीज का यह पर्व हर स्त्री को अपने अंदर की सर्वोच्च क्षमता पहचानने एवं आत्म जागृति के मार्ग पर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है। यह पर्व हमें एहसास कराता है कि उत्सव का असली अर्थ बाहरी श्रृंगार में नहीं अपितु अपने अंदर छिपी क्षमता को पहचान सत्य मार्ग का अनुसरण करने में है ।
तीज के अभियान में डीजेजेएस संतुलन द्वारा अलीगढ़, आगरा, द्वारका, जयपुर, कोटकपुर, मोगा, मुक्तसर साहिब, फरीदाबाद, नोएडा, पठानकोट, सुनाम समेत अनेक भारतीय शहरों में भव्य तीज कार्यक्रमों का आयोजन किया जिसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से डीजेजेएस संतुलन ने तीज पर्व के उत्सव को एक नया रूप दिया।संपूर्ण भारत भर से अनेकों महिलाओं ने इन सभी गतिविधियों चर्चाओं एवं चिंतन में उत्साह पूर्वक भाग लिया एवं वह अपनी आंखों में नई चमक में और एक नए आत्मविश्वास के साथ लौटीं। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था- हर स्त्री के अंदर आदि शक्ति का स्वरूप विराजमान है जिसे केवल जागृत करने की जरूरत है।
जिस प्रकार देवी पार्वती ने सतत साधना के माध्यम से अपने मार्ग की बढ़ाओ को अपने उत्थान की सीढ़ी बना लिया इस प्रकार आज भी महिलाएं अपनी भूमिकाओं, शंकाओं एवं सीमाओं से ऊपर उठ अपने अंदर की सर्वोच्च क्षमताओं की खोज कर सकती हैं।
दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा संचालित सामाजिक प्रकल्प “संतुलन- नारी सशक्तिकरण एवं लैंगिक समानता” का उद्देश्य आज के समय में नारी की उसी स्थिति को पुनः स्थापित करना है जो वैदिक काल में थी। संतुलन आध्यात्मिक सशक्तिकरण के माध्यम से महिलाओं को अधिनीकरण के दुष्चक्र से मुक्त कर उत्थान के मार्ग पर आगे बढ़ाने एवं उन्हें 21वीं साड़ी की वैदिक नारी बनाने के मार्ग पर सतत कार्यरत है।
डीजेजेएस अपने अनेकों सामाजिक प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षा, नशा उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण, आरोग्य, आपदा राहत एवं बंदी सुधार जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य करते हुए अपने मिशन विश्व शांति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
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