“आज जब स्वास्थ्य चिंता का विषय भी है और प्राथमिकता भी, ऐसे समय में प्राकृतिक उपचार - आयुर्वेद की ओर लौटना विकल्प नहीं, आवश्यकता बन चुका है।”

एक समय भारतीय जीवनशैली का अभिन्न भाग रहा आयुर्वेद आज धीरे-धीरे अप्रासंगिक होता प्रतीत हो रहा है, इसके सिद्धांत कमज़ोर होने से नहीं, बल्कि हमारी दिनचर्या इसके मूल सिद्धांतों से भटक जाने के कारण। आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि “रितुचर्या” - ऋतु परिवर्तन के अनुरूप जीवनशैली, “दिनचर्या” - मन और शरीर को संतुलित करने वाली दैनिक प्रक्रियाएँ, और “आहारचर्या” - स्वभाव (प्रकृति) के आधार पर संतुलित एवं सजग भोजन, इन सब पर आधारित एक संपूर्ण जीवन पद्धति है।
ये कालजयी सिद्धांत आयुर्वेद को मात्र उपचार से कहीं आगे, एक संपूर्ण और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान बनाते हैं। परंतु तीव्र शहरीकरण, बदलती खाद्य आदतें और जागरूकता की कमी ने इस समृद्ध परंपरा को तात्कालिक "क्विक फिक्स" समाधानों के बीच कहीं खो दिया है। इन्हीं मौलिक सिद्धांतों को पुनर्जीवित करने और समुदायों को वास्तविक, रोकथाम-आधारित स्वास्थ्य से जोड़ने के उद्देश्य से DJJS आरोग्य ने जमीनी स्तर पर पहल की है।

इसी दिशा में, पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के बीच सेतु बनाने हेतु DJJS आरोग्य द्वारा दिव्य धाम., दिल्ली के आसपास स्थित 66 गाँवों में मासिक निःशुल्क आयुर्वेद स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें शामिल है:
● निःशुल्क जाँच एवं परामर्श
● आयुर्वेदिक औषधियों का मुफ्त वितरण
● रितुचर्या, दिनचर्या और आहारचर्या आधारित जीवनशैली व आहार परामर्श
● रोग-निवारक स्वास्थ्य जागरूकता, जिससे समुदाय स्वयं अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी ले सके
यह पहल DJJS आरोग्य प्रोग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा है—जो समग्र स्वास्थ्य, निवारक देखभाल, शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के लिए समर्पित है, ताकि आयुर्वेद फिर से जीवंत, प्रभावी और प्रासंगिक बन सके।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ
अक्तूबर और नवंबर 2025 में आयोजित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य शिविरों में उत्साहपूर्ण भागीदारी रही:
● 5 अक्तूबर 2025: 154 लाभार्थी
● 2 नवंबर 2025: 143 लाभार्थी
● 7 दिसंबर, 2025: 155 लाभार्थी
इन शिविरों में निम्न सेवाएँ शामिल थीं:
✔ निःशुल्क व्यक्तिगत आयुर्वेदिक परामर्श
✔ नाड़ी परीक्षण
✔ व्यक्तिगत प्रकृति के अनुसार हर्बल औषधियाँ
✔ आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित आहार एवं जीवनशैली मार्गदर्शन
ये स्वास्थ्य शिविर अब एक नियमित पहल के रूप में हर महीने के पहले रविवार को आयोजित किए जाते हैं, जिससे समुदाय को निरंतर देखभाल और फॉलो-अप मिलता रहे।
इस अभियान का नेतृत्व डॉ. मनोज शामकुवार, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं विभागाध्यक्ष, पंचकर्म विभाग, ए एंड यू तिब्बिया कॉलेज, तथा डॉ. सुजाता राजन, प्रिंसिपल (आयुर्वेद), ए एंड यू टिब्बिया कॉलेज एवं हॉस्पिटल, सहित नौ समर्पित चिकित्सकों की टीम ने किया।
ये शिविर केवल स्वास्थ्य सेवाएँ नहीं, बल्कि समग्र कल्याण की दिशा में एक आंदोलन हैं—जो करुणा, विशेषज्ञता और सेवा की भावना के साथ मानवता की भलाई के प्रति हमारे संकल्प को पुनः स्थापित करते हैं।
आयुर्वेदिक देखभाल को सुलभ बनाकर, हम समुदायों को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ जीवन अपनाने और प्राकृतिक रूप से बीमारी को रोकने के लिए सशक्त बना रहे हैं।
