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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का समग्र शिक्षा कार्यक्रम मंथन - संपूर्ण विकास केंद्र (SVK) द्वारा संचालित विशेष मासिक पहल संस्कारशाला 4 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों हेतु एक प्रेरणादायी एवं संस्कारमय मंच प्रदान करती है। इन सत्रों का उद्देश्य बालमन में सनातन मूल्यों, भावनात्मक सुदृढ़ता एवं अनुशासित जीवनशैली का विकास करना है। अनुभवात्मक शिक्षण एवं मूल्य-आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को जीवनोपयोगी शिक्षाओं से जोड़ा जाता है।

Personal Hygiene Sanskarshala - DJJS Manthan SVK | April 2026

अप्रैल 2026 में “व्यक्तिगत स्वच्छता - स्वच्छ आदतें श्रेष्ठ संस्कार” विषय पर प्रेरणादायी संस्कारशाला सत्र आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य बच्चों एवं परिवारों में स्वच्छता, अनुशासन एवं स्वस्थ दैनिक आदतों के प्रति जागरूकता विकसित करना था। कार्यशाला में व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वच्छ परिवेश एवं सुव्यवस्थित जीवनशैली को उत्तम संस्कारों एवं सुदृढ़ चरित्र की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया गया।

अप्रैल 2026 में कुल 70 संस्कारशाला कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनसे देशभर की DJJS शाखाओं सहित NRI बच्चों एवं विभिन्न विद्यालयों के लगभग 3121 विद्यार्थी लाभान्वित हुए।

Personal Hygiene Sanskarshala - DJJS Manthan SVK | April 2026

राजस्थान
• सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बांसवाड़ा

उत्तर प्रदेश
• इंडियन पब्लिक स्कूल, बरेली
• नेम चंद पब्लिक स्कूल, बरेली
• शंकर मॉडर्न पब्लिक स्कूल, गाज़ियाबाद

इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य बच्चों में स्वच्छता, आत्म-अनुशासन एवं स्व-देखभाल की भावना को विकसित करना था, ताकि वे स्वस्थ एवं मूल्यनिष्ठ जीवनशैली को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें। संवादात्मक चर्चाओं, व्यवहारिक प्रदर्शन एवं रोचक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व से परिचित कराया गया।

पर्सनल हाइजीन संस्कारशाला के अंतर्गत बच्चों को नियमित नाखून काटने, जीभ की सफाई करने, दिन में दो बार दाँत साफ करने, भोजन के पश्चात कुल्ला करने, स्नान के बाद शरीर को भली-भाँति सुखाने, बाहर से लौटने पर पैरों को धोने तथा समग्र शारीरिक स्वच्छता बनाए रखने जैसी आवश्यक आदतों के विषय में शिक्षित किया गया। साथ ही नाखून चबाने एवं नाक में उंगली डालने जैसी अस्वच्छ आदतों से बचने के प्रति भी जागरूक किया गया। व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ बच्चों को टेबल शिष्टाचार, सामाजिक शिष्टाचार एवं अनुशासित दैनिक आचरण के प्रति भी संवेदनशील बनाया गया, जिससे वे स्वच्छता एवं स्वस्थ आदतों को समग्र जीवनशैली का अभिन्न अंग बना सकें।

सत्रों का एक अत्यंत रोचक भाग जीवाणुओं के प्रसार से संबंधित प्रत्यक्ष प्रदर्शन एवं वीडियो प्रस्तुतियाँ रहीं, जिनमें यह दर्शाया गया कि साधारण शारीरिक संपर्क, जैसे हाथ मिलाने से भी संक्रमण कैसे फैल सकता है। इस गतिविधि ने बच्चों में हाथों की स्वच्छता एवं व्यक्तिगत सफाई के महत्व के प्रति गहरी जागरूकता उत्पन्न की। एक अन्य जानकारीपूर्ण प्रस्तुति में शरीर की दुर्गंध, नियमित व्यायाम के महत्व तथा स्वच्छ आदतों के माध्यम से ताजगी एवं आत्मविश्वास बनाए रखने के उपायों पर प्रकाश डाला गया।

कार्यशाला के अंतर्गत बच्चों द्वारा पर्सनल हाइजीन किट निर्माण जैसी रोचक गतिविधियाँ भी करवाई गईं, जिनके माध्यम से उन्होंने दैनिक स्वच्छता से जुड़े आवश्यक उपकरणों के महत्व को समझा। हेयर-कॉम्बिंग गतिविधि के माध्यम से बच्चों को बालों की सही देखभाल एवं सुव्यवस्थित ग्रूमिंग के विषय में भी शिक्षित किया गया। सत्र का समापन जीवनोपयोगी स्वास्थ्य-संदेशों के साथ हुआ, जिसने सभी को यह प्रेरणा दी कि स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान, सुदृढ़ संस्कार एवं जिम्मेदार जीवन का प्रतिबिंब है।

अंत में समस्त प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से शांति मंत्र का उच्चारण किया, जिससे वातावरण शांति एवं आत्मचिंतन से ओतप्रोत हो उठा। सभी बच्चों ने श्रद्धापूर्वक दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के पावन चरणों में नमन अर्पित किया।

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