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आज समूचा विश्व दुख के सागर में डूब रहा है और इससे बाहर निकलने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा है। आज मानव की समस्या अपने अस्तित्व का रक्षण नहीं है, बल्कि भौतिक, भावनात्मक और बौद्धिक स्तर पर इंद्रियों से जुड़े सुखों की लालसा की ओर अंधी दौड़ है।

Shrimad Bhagwat Gita Paved Way to a Spiritually Managed Life at Moorooka, Brisbane, Australia

मनुष्य को सुख और शांति के स्रोत्र से जोड़ने हेतु दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए 31 अगस्त, 2019 को मूरूका, ब्रिस्बेन, ऑस्ट्रेलिया में "गीता एंड मैनेजमेंट" पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में श्री उमेश चंद्र (पूर्व अध्यक्ष, GOPIO, क्वींसलैंड), श्री राकेश शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, लक्ष्मी नारायण मंदिर), सीआर एंजेला ओवेन (पार्षद, ब्रिसबेन सिटी काउंसिल), सुश्री रोमा नय्यर (पूर्व सचिव, लेखक, लक्ष्मी नारायण मंदिर) और सुश्री उषा चंद्रा, भूतपूर्व राष्ट्रपति, GOPIO क्वींसलैंड आदि अतिथि उपस्थित रहे।

Shrimad Bhagwat Gita Paved Way to a Spiritually Managed Life at Moorooka, Brisbane, Australia

सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या प्रवक्ता साध्वी ओम प्रभा भारती जी ने 21वीं सदी के लोगों के लिए श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से भगवान कृष्ण के दिव्य संदेश की प्रासंगिकता को रखा। श्री कृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर अपने शिष्य अर्जुन से की गयी यह वार्ता “श्रीमद्भागवत् गीता” हमारे जीवन और अस्तित्व के प्रमुख सवालों का जवाब देती है। निसंदेह गीता सम्पूर्ण वैदिक साहित्य, योग, ज्ञान और दर्शन का सार है। श्रीमद्भागवत् गीता जीवन में आने वाली समस्याओं का हल प्रदान कर मानव को प्रभावी ढंग से जीवन जीने की ओर अग्रसर करने की प्रेरणा प्रदत्त करती है।

मानव जाति के सभी दर्द और दुखों का स्रोत "आसक्ति" और "भय" है। मनुष्य अपने निकट और प्रिय लोगों से जुड़ा हुआ है और केवल अपने परिवार, अधिकांश दोस्तों और रिश्तेदारों तक ही सीमित हैं और यही आसक्ति उसके दुःख का मूल है। अर्जुन भी युद्ध के मैदान में इसी  मनःस्थिति में थे। इन्ही भावनाओं से ग्रसित हो उनके मन में आसक्ति और भय के बादल छाने लगे थे। आज अधिकतर हम अपने कार्यस्थल में ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं, जब हम अनिश्चितताओं के डर के कारण निर्णय नहीं ले पाते हैं या फिर हमारे फैसले हमारी आसक्ति के कारण पक्षपाती होते हैं। वास्तव में अलग-अलग स्तर पर हर मनुष्य इस बीमारी का शिकार है, और हर मनुष्य को सही समय पर सही कार्य करने हेतु गीता की आवश्यकता है। श्रीमद्भागवत् गीता हमारे विचार तनाव को कम करते हुए महत्वपूर्ण ऊर्जा को संरक्षित करने का मार्ग प्रदान करती है। आत्मिक स्तर पर जागृत आत्मा परमात्मा की ऊर्जा का रूप है और आत्म-ज्ञान (ब्रह्मज्ञान) द्वारा यह जागरण सम्भव है।

इस सत्र में श्रीमद्भागवत् गीता की शिक्षाओं को बेहतर ढंग से समझाने के लिए व्यावहारिक और इंटरैक्टिव गतिविधियों का समन्वय किया गया। साध्वी जी ने लोगों को बताया कि मानव जीवन विशेष रूप से आध्यात्मिक उपलब्धि का मध्यम है क्योंकि पृथ्वी पर अन्य कोई भी प्रजाति आध्यात्मिक ज्ञान को समझने हेतु सक्षम नहीं है। मात्र आत्म-ज्ञान के द्वारा ही इस बदलती हुई दुनिया में हम वास्तविक रूप से खुश रह सकते हैं। हमारे भीतर ज्ञान और आनंद का एक अनन्त स्रोत्र है।

एक साधक बिना गुरु के आध्यात्मिक पथ पर बढ़ नहीं सकता। भगवान के सर्वोच्च विज्ञान का अनुभव करने के लिए एक आध्यात्मिक शिक्षक की शरण और मार्गदर्शन लेना अनिवार्य है। केवल पूर्ण सतगुरु ही अज्ञान का अंधकार समाप्त करते हुए भीतर प्रकाश को दिखाते हैं। जब हम आपके वास्तविक स्रोत्र के साथ नियमित संपर्क बनाते हैं, तो आत्मा, अनंत चेतना की स्थिति में पूर्ण आत्मविश्वास का अनुभव करती है। आत्म-जागरण की इस स्थिति में असम्भव को सम्भव करना भी सहज हो जाता है।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्न और उत्तर का सत्र भी रहा जिसमे उपस्थित लोगों ने अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए। इस प्रकार, श्रीमद्भागवत् गीता के दिव्य संदेश को सफलतापूर्वक प्रचारित किया गया, जिससे लोगों को आंतरिक जागृति की ओर निर्देशित किया गया।

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