20 से 26 सितंबर 2019 तक सहरसा, बिहार शाखा द्वारा पूर्णिया, बिहार में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। पूर्णिया, बिहार के अनेक श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। कथा व्यास साध्वी पद्महस्ता भारती जी ने श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।

साध्वी जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा हमारी संस्कृति का महान ग्रंथ है क्योंकि यह मानव जीवन के अर्थ को प्रगट करता है। भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि केवल भाग्यशाली लोगों को ही यह मानव शरीर प्राप्त होता है क्योंकि इस मानव शरीर में ही ईश्वर प्राप्ति सम्भव है। आध्यात्मिकता जीवन का आधार है और यही कारण है कि विश्व भर के भक्त भारत में आध्यात्मिकता को सीखने के लिए आते हैं। हालाँकि, आध्यात्मिक ज्ञान की इस समृद्धि को उन सभी लोगों द्वारा महसूस किया जाना चाहिए जिन्होंने इस पवित्र भूमि में जन्म लिया है।
श्रीमद्भागवत कथा प्राचीन राजा परीक्षित और ऋषि सुखदेव मुनि के बीच बातचीत की एक ज्ञानवर्धक श्रृंखला है। अपने जीवन के अंतिम चरण में राजा परीक्षित ने महान संत सुखदेव मुनि द्वारा मानव जीवन के सही अर्थ को समझने के लिए संपर्क किया। ऋषि ने राजा को ब्रह्मज्ञान प्रदान किया और उन्हें अनुभव करवाया कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड अपने भीतर ही है। सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित को राजा भरत की कहानी सुनाई। राजा भरत एक ऐसे धर्मी के रूप में जाने जाते थे जो अपनी प्रजा का बहुत ध्यान रखते थे। उन्होंने जीवन में मोक्ष प्राप्ति हेतु अपना महल छोड़ दिया और ध्यान करने लगे। राजा भरत को इस समय एक हिरण के लगाव हो गया और इस आसक्ति के कारण उन्होंने ब्रह्मांड के निर्माता के साथ मुक्ति और एकत्व का अवसर खो दिया। सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित को समझाया कि यह संसार भ्रम का चक्रव्यूह है और जीवन का लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है। जो इस चक्रव्यूह में उलझता है वह जीवन के वास्तविक लक्ष्य को खो देता है और इसलिए उसे जन्म और मरण के आवगमन से गुजरना पड़ता है।

साध्वी जी ने बताया कि जो इस श्रीमद्भागवत कथा को सुनकर एक सिद्ध गुरु के पास विनम्रतापूर्वक ज्ञान प्राप्त करने के लिए झुकता है वह मोक्ष के इस महान पथ को प्राप्त करता है। जो इस ज्ञान मार्ग पर लगातार चलाता है और गुरु के आदेशों का पालन करता है माया के भ्रमजाल से मुक्त हो जाता है।
वर्तमान समय में गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी अपने सभी शिष्यों को यह ईश्वरीय ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। असंख्य शिष्यों ने इस ज्ञान से लाभ उठाया है और महान जीवन की राह पर बढ़ चले हैं।