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दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की असीम कृपा से, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 01 से 07 अप्रैल 2026 तक पटियाला, पंजाब में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया। इस कथा का मुख्य उद्देश्य जीवन में सनातन विज्ञान ‘ब्रह्मज्ञान’ की शाश्वत विधि की अनिवार्यता को उजागर करना था, ताकि मानव आत्म जागृत होकर जीवन जीने की सही कला की ओर प्रेरित हो सके।

Shrimad Bhagwat Katha marked as the calling of Eternal Souls to live in ‘’Divine Consciousness’’ at Patiala, Punjab

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण के श्रीचरणों में श्रद्धा-भरी प्रार्थना से हुआ। कथा कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों एवं हज़ारों श्रद्धालुओं ने गहन आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात करने हेतु अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई।

कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती जी ने सनातन आध्यात्मिक ज्ञान में निहित जीवन-परिवर्तनकारी मूल्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आज के संघर्षमय युग में श्रीमद् भागवत कथा एक आध्यात्मिक मानचित्र है, जो हमें अपने अंतःकरण की गहराइयों को खोजने की ओर ले जाती है।

Shrimad Bhagwat Katha marked as the calling of Eternal Souls to live in ‘’Divine Consciousness’’ at Patiala, Punjab

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को श्रवण कर श्रद्धालुओं ने अपनी भावनात्मक ऊर्जा को सांसारिक चिंताओं से मोड़कर दिव्यता की ओर केंद्रित किया। मार्मिक उदाहरणों ने गूढ़ आध्यात्मिक प्रेरणाओं को सरलता से श्रोताओं के हृदय में उतार दिया। शास्त्रों के अनुसार, पूर्ण सतगुरु पृथ्वी पर दिव्यता के साकार स्वरूप होते हैं। यदि श्रीमद् भागवत अज्ञान की नींद से जागने की औषधि है, तो सतगुरु वह चिकित्सक हैं जो उसे देने की विधि जानते हैं। बाहरी नेत्रों की सीमित पहुँच से हम अनंत को नहीं देख सकते। जिस प्रकार दूरस्थ तारों को देखने हेतु टेलीस्कोप और सूक्ष्म जीवों को देखने हेतु माइक्रोस्कोप की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार प्रभु के दर्शन हेतु ‘आध्यात्मिक दृष्टि’ आवश्यक है। यह दिव्य दृष्टि केवल पूर्ण सतगुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है।

पूर्ण गुरु ब्रह्मज्ञान की दीक्षा के समय दिव्य नेत्र को तत्क्षण खोल देते हैं और शिष्य को उसके अंतःकरण में प्रभु के दर्शन कराते हैं। जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना विराट स्वरूप दिखाया, तब पहले उन्होंने उसे “दिव्य चक्षु” प्रदान किया। उसी प्रकार सतगुरु शिष्य को उस दिव्य प्रकाश को धारण करने योग्य पात्र बनाते हैं। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से प्राप्त यह सनातन विद्या आज करोड़ों लोगों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है।

सात दिवसीय कथा के पश्चात श्रोताओं के हृदय गहन एवं प्रबुद्ध विचारों से परिपूर्ण थे। भक्तिमय भजनों की आनंदमयी वर्षा ने वातावरण को सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं को अपनी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं का समाधान एवं जीवन में दिशा प्राप्त हुई। इस अवसर पर डीजेजेएस की विभिन्न सामाजिक एवं आध्यात्मिक पहलों का भी परिचय दिया गया, जो समाज में सकारात्मक प्रभाव लाने हेतु निरंतर कार्यरत हैं।

कार्यक्रम को विभिन्न प्रिंट मीडिया द्वारा व्यापक कवरेज प्राप्त हुई। समापन पर श्रद्धालुओं ने आयोजकों एवं स्वयंसेवकों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की और इस प्रकार आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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