श्रीमद्भागवत कथा ने बिहार के गोपालगंज में कर्म सिद्धांत का रहस्य प्रकट किया

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"इस संसार में मनुष्य अपने कर्मों से अपने भाग्य का स्वयं निर्माण करता है।"

यह संसार कर्म रूपी मूलभूत नियम पर आधारित है। जो कर्म हम बीज रूप में करते हैं वही हमें फल के रूप में प्राप्त होते हैं। कर्म का सिद्धांत अद्भुत तरीके से जीवन को प्रभावित करता है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने 24 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2018 तक बिहार के गोपालगंज में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से कर्म के इस रहस्य को प्रगट किया। इस पवित्र कथा का वाचन साध्वी पद्महस्ता भारती जी ने किया।

कथा का शुभारम्भ मंगल कलश यात्रा से हुआ जिसमे बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कलश यात्रा में सौभाग्यवती महिलाओं ने वैदिक मंत्रों का जाप करते हुए, कलश को धारण किया। इस यात्रा ने आसपास के क्षेत्रों में कथा का संदेश प्रसारित किया। प्रत्येक दिन कथा का आरम्भ भगवान श्री कृष्ण के चरणों में प्रार्थनाओं के साथ हुआ। साध्वी पद्महस्ता भारती जी ने कई उपाख्यानों को कथा के माध्यम से भक्तों के समक्ष रखा। उन्होंने भगवान कृष्ण और कंस की कथा को विस्तार से सुनाया। उन्होंने उल्लेख किया कि भले ही कंस भगवान कृष्ण के मामा थे, परन्तु फिर भी उन्हें अपने कर्मों को भोगना पड़ा। साध्वी जी ने वर्णन किया कि इस दुनिया के हर व्यक्ति को अपने द्वारा किए गए हर कर्म का भुगतान करना होगा। समयावधि चाहे जो भी रहें, परन्तु हमें जो बोया है उसे काटना ही पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी कार्य को करने से पहले दो बार सोचने की जरूरत है क्योंकि हमारे यही कर्म, भाग्य रूप में हमारे पास वापस आ जाते हैं। साध्वी जी जी ने अपनी भक्ति वार्ता के माध्यम से भक्ति परिपूर्ण आभा मंडल निर्मित किया। उन्होंने समझाया कि व्यक्ति को अपने कर्म भोगने होते हैं लेकिन शाश्वत ज्ञान यानी "ब्रह्मज्ञान" एक ऐसा तरीका है जिसके माध्यम से व्यक्ति सही कार्य को करने का निर्णय ले पाता है। केवल यह ब्रह्मज्ञान ही वह माध्यम है जिसके द्वारा इस कर्म सिद्धांत को समझाया जा सकता है और एक व्यक्ति कर्म के बंधन से मुक्त हो सकता है।

कथा में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और प्रत्येक गुजरने दिन के साथ भक्तों की संख्या बढ़ती गयी। साध्वी जी द्वारा भक्ति विचारों व प्रशिक्षित भक्त संगीतकारों द्वारा भक्ति रचनाओं के गायन ने कथा पंडाल ने दिव्य आभा का निर्माण किया। कथा का समापन हवन द्वारा हुआ जिसमे बड़ी संख्या में भक्तों ने शामिल हो, कथा की सफलता को अंकित किया।

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