आज के डिजिटल युग में, जहाँ स्मार्टफोन और सोशल मीडिया दैनिक जीवन पर हावी हो चुके हैं, वहीं अत्यधिक स्क्रीन उपयोग चुपचाप ध्यान, संबंधों और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। इस बढ़ती हुई चिंता को समझते हुए, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान(डीजेजेएस) ने अपनी ‘बोध’ प्रकल्प के अंतर्गत, युवा परिवार सेवा समिति (वाईपीएसएस) के सहयोग से, “अनप्लगिंग – डिजिटल से दूर नहीं, बस माइंडफुल हो जाओ” शीर्षक से एक राष्ट्रव्यापी अभियान प्रारंभ किया।यह पहल एक सशक्त जागरूकता आंदोलन के रूप में उभरी।

अभियान की पहुँच एवं प्रभाव
अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच आयोजित इस अभियान के अंतर्गत 47 सत्रों के माध्यम से 10 राज्यों—राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, पंजाब, कर्नाटक और दिल्ली—में कुल 13,604 लोगों तक पहुँच बनाई गई। इस अभियान में विद्यार्थियों, अभिभावकों, पेशेवरों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे इसका संदेश व्यापक रूप से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचा।

जागरूकता से उत्पन्न बदलाव
इस अभियान की सफलता प्रतिभागियों में उत्पन्न हुई गहन आत्मचेतना में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
“क्या हम मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं या मोबाइल हमारा उपयोग कर रहा है?”—यह प्रश्न अनेक लोगों के लिए आत्ममंथन का कारण बना।
- विद्यार्थियों ने स्वीकार किया कि अत्यधिक स्क्रीन उपयोग उनके समय और एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है
- अभिभावकों ने पारिवारिक संवाद में आई कमी को महसूस किया
- युवाओं ने निरंतर आने वाली सूचनाओं के कारण मानसिक शांति पर पड़ रहे प्रभाव को समझा
- वरिष्ठ नागरिकों ने डिजिटल उपयोग में संतुलन की आवश्यकता को स्वीकार किया
ये सभी अनुभूतियाँ संवाद, गतिविधियों एवं आत्मचिंतन के माध्यम से स्वाभाविक रूप से विकसित हुईं।
नवाचारपूर्ण सहभागिता प्रारूप
अभियान के अंतर्गत 7 विशिष्ट एवं अनुभव-आधारित गतिविधियों को शामिल किया गया, जिससे प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हुई:
- हू इज़ द रियल बॉस कार्यशालाओं के माध्यम से डिजिटल आदतों का आत्ममूल्यांकन
- ग्राउंड स्कूल फेस्ट के माध्यम से बच्चों को बाहरी खेलों के लिए प्रेरित करना
- अभिभावक कार्यशालाओं द्वारा डिजिटल अनुशासन को बढ़ावा देना
- वरिष्ठ नागरिक सत्रों में संतुलित उपयोग पर मार्गदर्शन
- बच्चों के लिए कहानी एवं खेल आधारित कार्यशालाएँ
- पार्क कार्यक्रमों के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक एवं प्रदर्शनियाँ
- स्ट्रीट क्विज़ के माध्यम से जन-जागरूकता
इन सभी प्रारूपों ने प्रतिभागियों को केवल सुनने ही नहीं, बल्कि अनुभव करने का अवसर प्रदान किया।
डिजिटल डिटॉक्स से डिजिटल अनुशासन की ओर
अभियान का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि लोगों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन आया। प्रतिभागियों ने तकनीक से दूर जाने के बजाय उसे सजगता के साथ उपयोग करने की आवश्यकता को समझा।
- स्क्रीन टाइम निर्धारित करना
- भोजन के समय मोबाइल से दूरी बनाना
- वास्तविक संबंधों को प्राथमिकता देना
- अपने डिजिटल उपयोग के प्रति जागरूक रहना
मीडिया कवरेज
इस अभियान को विभिन्न क्षेत्रीय समाचार पत्रों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स एवं स्थानीय मीडिया चैनलों द्वारा व्यापक सराहना एवं कवरेज प्राप्त हुआ। इसके व्यावहारिक एवं जनसामान्य से जुड़े दृष्टिकोण ने इसे विशेष रूप से सराहा गया, जिससे इसका संदेश और अधिक लोगों तक पहुँचा।
डीजेजेएस की आध्यात्मिक दृष्टि के अनुसार, समस्या तकनीक में नहीं, बल्कि मन के असंतुलन में है। जब मन जागरूक और नियंत्रित होता है, तब डिजिटल साधन भी हमारे विकास के माध्यम बन जाते हैं।
“अनप्लगिंग – डिजिटल से दूर नहीं, बस माइंडफुल हो जाओ” आज एक अभियान से आगे बढ़कर एक जनआंदोलन बन चुका है, जो लोगों को संतुलित, सजग और सार्थक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
