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दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के समाधि दिवस पर नूरमहल आश्रम, पंजाब में शिष्यों ने अपनी साधना व समर्पण को सुदृढ़ करने का लिया संकल्प
बुधवार, 28 जनवरी 2026 को, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस), नूरमहल आश्रम, पंजाब का पावन वातावरण दिव्य ऊर्जा से सराबोर हो उठा, जब दिव्य गुरु श्री अशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) के हजारों शिष्य उस दिव्य दिन का स्मरण करने के लिए एकत्र हुए, जब वे समाधि की स्थिति में प्रविष्ट हुए थे। सभी ने मानवता के कल्याण के अपने दायित्व को पूरा करने हेतु अपने आध्यात्मिक अनुशासन को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दिखाई।

“मेरे सतगुरु प्यारे” नामक इस भव्य कार्यक्रम ने संगठित समर्पण की सामूहिक भावना को सुंदरता से अभिव्यक्त किया। निकट एवं दूरदराज़ क्षेत्रों से आए भक्त एकता के भाव में संजोये हुए, विश्वास की आभा से आच्छादित चेहरों और स्थिरचित्त मन के साथ थे और उनकी आत्माएँ गुरु के शाश्वत मार्गदर्शन से उन्नत हो रही थीं।
डीजेजेएस के प्रतिनिधियों ने दिव्य गुरुदेव के महान दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला तथा इस बात को रेखांकित किया कि श्रद्धालु विश्व शांति की स्थापना के उनके महान मिशन में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि गुरु की सूक्ष्म कृपा प्रत्येक शिष्य के हृदय में निरंतर स्पंदित होती रहती है, जो मार्गदर्शन प्रदान करती है, संरक्षण करती है और उच्चतर चेतना को जागृत करती है। शिष्य अडिग विश्वास में दृढ़ रहते हैं और उनकी शाश्वत उपस्थिति से साहस प्राप्त करते हैं।
यह सभा एक आध्यात्मिक संकल्प के क्षण में परिवर्तित हो गई। शिष्यों ने ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना और अनुशासनपूर्वक भक्ति को प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रत्येक हृदय पहले से अधिक सशक्त और जागृत होकर लौटा, गुरु की शिक्षाओं को केवल स्मरण ही नहीं बल्कि अक्षरशः और भावपूर्वक जीवन में उतारने के लिए तत्पर होकर लौटा।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान के साथ हुआ, जिसमें शिष्यों ने भक्तिपूर्वक सामूहिक प्रार्थना में भाग लिया, जिससे मानवता को सद्भाव, जागृति और शांति की ओर प्रेरित किया गया।