Watch Shri Ram Katha, Patna, Bihar, Day-6 by Sadhvi Shreya BhartiWATCH NOW

नटखट बातों में तत्व के मोती!

कार्तिक मास की रात्रि का अंतिम प्रहर! पूरी नगरी अभी तक मीठी नींद में सो थी।शीत बयार मनो सबको लोरी सुना रही थी।पर दस वर्ष का यह नन्हा योगी निद्रा को त्याग कर उठ खड़ा हुआ था| उसने धीरे से अपनी कुटिया  का किवाड़ खोला। ताकि भीतर सो रहे उसके छोटे भाई-बहनों  की आँख न खुल जाए।बाहर शीतल पवन ने जैसे ही उसकी कोमल देह को छुआ, वह कांप गया।

... वह सिरह उठा।पर तभी उसे याद आए ,अपने पिता विट्ठल पंत के वे शब्द -'वत्स निवृति, तुम ज्येष्ठ पुत्र हो! ज्ञानेश्वर,सोपान और मुक्ता - तुम इन तीनों  के आदर्श हो! सदा याद रखना, जीवन में अनेक संघर्ष  भरी स्थितियाँ आती  हैं -कभी प्राकृतिक,कभी पारिवारिक,कभी सामाजिक,तो कभी अध्यात्मिक!  पर इन स्थितियों में सदा अपने मन को स्थिर और अविचल रखना। डटकर हर स्थिति का सामना करना...'

इस संवाद का स्मरण होते ही निवृत्ति की काँपती देह स्थिर हो गई।

...

ज्ञानेश्वर- निवृत्ति भैया, माता-पिता के देहान्त के बाद हम सब अनाथ हो गए हैं!

निवृत्ति- इश्वर के होते हुए कोई अनाथ नहीं होता। वह परमपिता सबका नाथ है। 

ज्ञानेश्वर- पर मृत्यु कितनी भयानक होती है।

निवृत्ति- ज्ञानी पुरुषों के लिए नहीं! उनके लिए तो मृत्यु का अर्थ है, मुक्ति! मोक्ष!

तभी द्वार पर खड़ी मुक्ता बीच में बोली- 'भैया, यह मोक्ष क्या होता है?'

निवृत्ति और ज्ञानेश्वर दोनों हँसने लगे।

मुक्ता ( रुआंसे स्वर में)- हाँ, तुम सब ज्ञानी हो, समर्थ हो। मैं ही बस अज्ञानी हूँ।

ज्ञानेश्वर- अरी मुक्ता, तुम तो सबसे सयानी हो। बल्कि हम सबका बोझ तुम ढो रही हो। हमें भूख लगी है। जल्दी से अन्नपूर्णा बनकर हमारी क्षुधा शांत करो ...

इतना सुनना था कि मुक्ता फटाफट भीतर दौड़ी। वह अंगीठी पर दूध चढ़ा कर भूल ही गयी थी। ... वह रोते-रोते बाहर आई- 'ज्ञानेशा भैया, सारा दूध उफन कर नीचे गिर गया।'

ज्ञानेशा- 'अरे बहना, दूध में ही तो उफान आया है।कौन सी बड़ी बात है! ध्यान तो इस बात का रखना है कि हममें कभी अहंकार का उफान न आए। हमारा जीवन कहीं अहं के उफान में बह न जाए।'

मुक्ता- पर भैया, चूल्हे की आग तो बुझ गई है।

निवृत्ति- बुझ गई तो क्या हुआ, बावली। यूँ रोटी क्यों है? हमारी ...

इतिहास साक्षी है कि बालपन में ही ज्ञानवृद्ध हुए इन चारों बालकों ने विश्व को अध्यात्म का अनूठा मार्ग दिखलाया। कैसे?

पूर्णतः  जानने के लिए पढ़िए इस बार की चैत्र मास, विक्रमी संवत 2070 की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

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