वैदिक काल की विज्ञान-यात्रा!

चार दोस्त- गौरव, अक्षय, सुनील और हर्ष, विज्ञान के छात्र हैं। ये चारों अकसर आपस में वैज्ञानिक विषयों पर चर्चा करते रहते हैं। इनमें से हर्ष को आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ वैदिक विज्ञान का भी ज्ञान है। वह प्रायः गौरव, अक्षय और सुनील को वैदिक युग की वैज्ञानिक खोजों के विषय में बताकर अचंभित करता रहता है। ये तीनों हर्ष की बातों को स्वीकार नहीं कर पाते, क्योंकि इनके लिए वैदिक काल एक पिछड़ा हुआ युग था… पर हर्ष ने भी यह  ठान लिया कि वह इनको वैदिक विज्ञान के तथ्यों को स्वीकार कर ही दम लेगा।

इसलिए आज हर्ष इन्हें समय-प्रवाहिनी नदी में नौका विहार के लिए लेकर जा रहा है। इस नदी की विशेष बात यह है कि इसके बाईं ओर के तट पर आधुनिक विज्ञान की झलक दिखाई देती है; पर इसका दायाँ छोर वैदिक कालीन विज्ञान का साक्षात्कार करा रहा है। सारे दोस्त इस नदी में नौका-विहार करते हुए देखते जाएँगे कि क्या इन दोनों तटों में कोई समानता है? या कहीं एक तट दूसरे की अपेक्षा उन्नत और समृद्ध तो नहीं! तो चलिए, हम क्यों पीछे रहें! हम भी इनके साथ नौका पर सवार होते हैं और चलते हैं- विज्ञान दर्शन पर! सवार होने के लिए बढ़िए जून 2013 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका के वैदिक विज्ञान अंक की ओर!

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