मॉडर्न गुरु-भक्ति!

'क' से ...?

'ख' से ...?

'ग' से ...?

क्या कहा? कबूतर ... खरगोश ... गमला!

अजी! आप कौन से ज़माने में जी रहे हैं? आप शायद भूल रहे हैं की आप मॉडर्न युग के मॉडर्न निवासी हैं। आज के टाइम में 'क' से कबूतर नहीं, 'क' से कम्प्यूटर होता है।

यह इक्कीसवीं सदी है। यहाँ सबकुछ हाई-टैक है- हाई-टैक मशीनें, हाई-टैक मोबाइल, हाई-टैक रहन- सहन और हाई-टैक गुरु-भक्ति! हाई-टैक गुरु-भक्ति!? जी हाँ! मॉडर्न ज़माने की मॉडर्न गुरु-भक्ति! जिसमें पैनड्राइव, हार्ड-डिस्क, स्कैनर आदि हाई-टैक उपकरणों और टेक्नालजी का इस्तेमाल होता है। कैसे? आइए, जानें- 

... महात्मा बुद्ध का शिष्य आनंद सत्संग सुनने के लिए इसी टेक्नालजी को अपनाया करता था। जब भी बुद्ध प्रवचन करते, आनंद पूरी तल्लीनता से उनके एक-एक विचार को सुनता। ... फिर वह अकेले में बैठकर, उन प्रवचनों के सार को अपने भीतर जज़्ब कर लिया करता था। एक बार बुद्ध ने अपने उपदेशों में भिक्षुओं को कुछ महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए। सभी भिक्षु सत्संग सुनकर लौट गए। शाम को राहुल और स्वस्ति किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। चर्चा खत्म होने पर जब राहुल जाने लगा, तो स्वस्ति उसे रोक कर बोला- 'सुबह महाबुद्ध ने हम सबको ११ निर्देश दिए थे। किन्तु मुझे उनमें से कुछ ही याद हैं। क्या तुम मुझे फिर से वे ११ निर्देश बता सकते हो?' राहुल - ... मुझे तो सिर्फ ९ ही याद हैं। लेकिन कोई बात नहीं! हम ... आनंद से पूछ लेंगे।'

स्वस्ति- क्या आनंद को सारे उपदेश याद होंगे?

राहुल- याद न होने का सवाल ही नहीं उठता।

 वो कौनसी डाटा-डिवाइस थी आनंद के पास, जिससे वह सब कुछ याद रख पाता था? 

... ज़रूरी डाटा किसी भी स्थिति में खो न जाए, इसके लिए घर आकर इस डाटा को स्कैन, प्रिंट और इनस्टॉल ज़रूर करें।

स्कैन, प्रिंट और इनस्टॉल का क्या मतलब है? मॉडर्न गुरु-भक्ति में कैसे पैनड्राइव, हार्ड-डिस्क, स्कैनर, इंटरनेट आदि हाई-टैक उपकरणों और टेक्नालजी का इस्तेमाल होता है? जानने के लिए पूर्णतः पढ़िए जुलाई 2013 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान पत्रिका का विशेष गुरु-पूजा अंक!

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