किलर टी.वी!

आइए चलते हैं, आपके घर के सबसे फेवरेट कार्नर में! जहाँ घर का हर सदस्य एक रंगीन डिब्बे के आगे बैठकर मनोरंजन का ज़ायका लेता है। ...आप समझ ही गए होंगे कि हम किस डिब्बे की बात कर रहे हैं। जी हाँ...हम सबका 'प्यारा' टेलीविज़न! दूर क्या जाना! आप खुद को ही जाँच कर देख लीजिए कि आप पर टी.वी का कितना ज़ोर चलता है?

उत्तर हाँ/न में दें-

1) ...आप सबकुछ छोड़कर अपने पसंदीदा टी.वी शो के आगे ही बैठे रहते हैं?

2) आप अपने परिवार के साथ कम और टी.वी के साथ ज़्यादा समय बिताते हैं?

3) एक भी दिन यदि टी.वी देखने को न मिले, तो आपको खाना हज़म नहीं होता?

4) चाहे कुछ काम का न आ रहा हो, लेकिन आप फिर भी रिमोट हाथ में पकड़ कर बैठे रहते हैं? चैनल पर चैनल पर बदलते रहते हैं?

5) एक बार टी.वी आन होने पर, उससे आफ करना आपके लिए बहुत मुश्किल होता है?

तो कहिए, कितने उत्तर 'हाँ' में रहे? शर्माइए मत। आप अकेले नहीं हैं। ...आँकड़ो के मुताबिक, अमरीका का प्रत्येक व्यक्ति अपनी ज़िंदगी के औसतन 13 अनमोल वर्ष टी.वी देखने में खर्च कर देता है। और बदले में क्या पाता है? बहुत कुछ! टी.वी अपने दर्शकों पर दिल खोलकर उपहार लुटाता है। जानना चाहेंगे क्या? 

...टी.वी और बीमारियों के आपसी संबंध को समझना मुश्किल नहीं है। 

...टी.वी देखने से आयु कम होती है।

...ज़्यादा टी.वी देखने से एकाग्रता कमज़ोर होती है।

टी.वी से होने वाली इन सभी हानियों का पूर्णतः वैज्ञानिक तौर पर समझने के लिए, और इसके कुप्रभाव से बचने के समाधान को जानने के लिए पढ़िये सितम्बर 2013 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका!

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