जागो! जागो! सुबह हो गई!

सुबह के पांच बजे। टिनी नीनी टिनी नीनी ... विनीत का अलार्म बजा। 'टिनी नीनी' सुनकर उसने झट से अलरम को बंद किया और दूसरी तरफ करवट बदल कर सो गया। यह तो था, अलार्म बजने पर विनीत का रिएक्शन! कहीं आप भी तो ऐसा ही नहीं करते? यदि आप भी सुबह अपने बिस्तर को देर से अलविदा कहते हैं, तो सावधान!

घड़ी या मोबाइल के अलार्म को नज़रअंदाज़ करने का मतलब है- खतरे को बुलावा देना। अपने स्वास्थ्य को डेंजर ज़ोन में ले जाना! क्योंकि यदि आपने अपनी इस आदत को नहीं सुधारा, तो बहुत जल्द आप पर इन सारी बीमारियों- उनींदापन, थकान, बेचैनी, शरीर की पाचन प्रक्रिया में खराबी- का हमला होने वाला है।

अभी हाल ही में हुए एक शोध में यह सिद्ध किया गया कि नींद के समय में गड़बड़ी होने से टाइप २ डाइबिटीज़ और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। इसके विपरीत समय पर सोना और सुबह ज़ल्दी उठना हमारे लिए हर तरह से लाभदायक है। 

... प्रातः जल्दी उठने वाला व्यक्ति, रात को देर तक जागने वाले व्यक्ति की तुलना में अधिक सकारात्मक रहता है। ...

... वैज्ञानिक शोध भी सिद्ध करते हैं कि दिन के अन्य समय की तुलना में सुबह के समय में ... हमारा शरीर व मस्तिष्क शांत व प्रसन्नचित्त अवस्था में होते हैं।

... ऐसे एक ही नहीं कई बहुत महत्वपूर्ण लाभ है जिन्हें पढ़कर आप के मन में भी जल्दी उठने का ख्याल आ रहा होगा। ... परन्तु इस भारी-भरकम को करने में मन आनाकानी कर रहा होगा। सुबह उठने के सारे लाभ और वो सरल टिप्स जिसको जानने के बाद आप अपने आलस्य को पूर्णतः अलविदा कर पाएँगे, पढ़िए नवम्बर माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान पत्रिका का यह विशेष सेहत सार! 

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