Watch Shri Ram Katha, Patna, Bihar, Day-7 by Sadhvi Shreya BhartiWATCH NOW

समाधि- राजविद्या राजगुह्यं!

गत दिवसों में एक विषय को सनसनी अथवा रहस्य के तौर पर समाज में प्रसारित किया गया। वह विषय है-समाधि! वास्तव में, समाधि कोई रहस्य नहीं, एक अत्यंत आलौकिक या पारलौकिक अवस्था है जो देहातीत है, मंन-बुद्धि से अतीत है, जिसकी तुलना में मानव की विचार शक्ति और विज्ञान के संसाधन नितांत बौने हैं। प्रस्तुत लेख द्वारा हम समाधि के यथार्थ स्वरूप को प्रकाशित कर रहे हैं।

वास्तव में क्या है समाधि?

योग ऋषि पतंजलि जी ने अष्टांग योग सूत्रों में मानवीय चेतना के उत्तरोतर विकास को दर्शाया है। एक आध्यात्मिक साधक का आत्मिक विकास सात चरणों (यम, नियाँ, आसान, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान) से गुज़ारता हुआ अंततोगत्वा समाधि के रूप में अभिव्यक्त होता है।

... अतः समाधि वह उत्कृष्‍टम या उच्चतम पड़ाव है, जहाँ चेतना स्वयं को पूर्ण रूप से अभिव्यक्त करती है; जहाँ व्यष्टि और समष्टि का भेद तिरोहित हो जाता है। 'समाधि' शब्द का संधि विच्छेद किया जाए, तो 'समाधि' = 'सम' + ''अधि' अर्थात् समान रूप से, पूरी निरंतरता से, परम चेतना में अधिष्ठित हो जाना- यही समाधि है। यह विद्याओं की विद्या- 'राजविद्या' है। गोपनीय से भी गोपनीय- 'राजगुह्यं' अवस्था है।

....

समाधिस्थ देह की क्या स्थिति रहती है?

... जहाँ स्वरूप शून्यवत प्रतीत हो, उसे समाधि कहते हैं।

... समाधि की यह अवस्था एक मृत देह के समान ही दृष्टिगोचर होती है। ...इस स्थिति को जब वैज्ञानिक यंत्रों द्वारा मापने का प्रयास किया जाता है, तो सभी परिणाम शून्य ही निकालते हैं। धमनियों की गति शून्य! श्‍वास-क्रिया शून्यवत्! हृदय-क्रिया-सीधी रेखा! मस्तिषकीय क्रियायेँ सीधी रेखा! इन समस्त परिणामों के आधार पर आधुनिक विज्ञान एक 'समाधिस्थ देह' को 'मृत' तथा 'समाधि' को मृत्यु (clinical death) करार दे देता है।

वास्तव में इस अवस्था का रहस्य क्या है? ... समाधि की प्रक्रिया कैसे घटती है? ...समाधि का साक्ष्य कौन है? ...समाधिस्थ गुरु के प्रति शिष्य का क्या धर्म होता है? इन सभी प्रश्नों का पूर्णतः समाधान पाने के लिये पढ़िये मार्च माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका!

Need to read such articles? Subscribe Today