वैज्ञानिकों की सफलता के रहस्य!

न्यूटन, आइंस्टीन, डार्विन, ..., जगदीश चन्द्र बसु,... इन सब वैज्ञानिकों के नाम पढ़ते या सुनते ही याद आ जाती हैं, इनसे जुड़ी खोजें व आविष्कार। स्मृति पटल पर उभर आते हैं, वे पुरस्कार व उपाधियाँ जिनसे इन्हें सम्मानित किया गया।  पर क्या कभी हमने विचार किया कि कैसे ये साधारण व्यक्ति से सफल वैज्ञानिक बन गए? ऐसी इनमें क्या विशेषताएँ थीं, जिसके कारण इनका नाम इतिहास के पन्नों पर हस्ताक्षर बन गया? आइए, इनकी जीवन-गाथा से कुछ ऐसे दृष्टांतों को चुनते हैं, जो हमें सफल होने के सूत्र दे जाएँ...

गज़ब की सहनशक्ति!

न्यूटन का एक पालतू कुत्ता था- डायमंड।  हालाँकि वह बहुत शरारती था, पर न्यूटन का दुलारा था। एक रात डायमंड घर पर अकेला था।  न जाने उसे क्या सूझी! अपने मालिक की स्टडी टेबल के पास पहुँच गया।  बहुत देर तक तो उस टेबल के सामने रखी कुर्सी पर    बैठा रहा। शायद यह अहसास करना चाह रहा था कि उसके मालिक को इस कुर्सी पर बैठकर ऐसा क्या आनंद मिलता है  कि वे २४ में से १८ घंटे इसी पर बैठे रहते हैं! फिर एकाएक वह टेबल पर चढ़ गया।  टेबल पर रखे पन्नों को शायद पढ़ने की यह कोशिश थी, इसलिए तो उन सबको पूरी टेबल पर बेतरतीब ढंग से फैला दिया। इसी दौरान, उसका पैर टेबल पर रखी जलती हुई मोमबत्ती से जा टकराया।  मोमबत्ती के गिरते ही कागज़ों ने आग पकड़ ली।  डायमंड डरकर वहॉँ से भाग गया।  पर आग ने अपना काम ज़ारी रखा। उसने टेबल पर पड़े सारे कागज़ों को जलाकर ही शांति ली। 

न्यूटन जब घर लौटे, तो डायमंड को एक कोने में सहमा हुआ बैठ पाया।  ...इतने में उन्हें कुछ जलने की बू आई।  ...कक्ष में दौड़े।  टेबल पर अपने रिसर्च के कागज़ों की जगह उनकी राख पाई...

अपनी सालों की मेहनत को यूँ स्वाह हुआ देख क्या प्रतिक्रिया हुई न्यूटन की, और अन्य उपरोक्त वैज्ञानिकों ने भी कैसे अपने जीवन में आई कठिन परिस्थितियों में हार को भी जीत में बदल दिया? जानने के लिए पढ़िए मई माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका!

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