जो साध्य साध लेंगे, वे श्रेष्ठ बन सकेंगे…!

सर्वात्मा चेतना का जागरण साधना है।

जो साध्य साध लेंगे, वे श्रेष्ठ बन सकेंगे।

उज्जवल श्रेष्ठ साधक नवयुग ला सकेंगे।

इनके सुसंगठन का अवतरण साधना है।


गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा प्रेरित भजन की ये पंक्तियाँ स्वयं श्री महाराज जी के प्रमुख आदर्श को उजागर कर रही है। ... इन पंक्तियों में व्यष्टि से समष्टि तक की एक दिव्य यात्रा अंकित है। श्री महाराज जी का आह्वान है- पहले व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाओ। उसके देह-राज्य में व्यवस्था कायम करो। किस प्रकार? सर्वात्म यानी परमात्म-चेतना के जागरण से! ... ब्रह्मज्ञान की साधना से! ध्यान- साधना के अभ्यास से एक-एक व्यक्ति श्रेष्ठ व उज्जवल बनेगा। फिर इन्हीं उज्जवल इकाइयों का संगठन उज्जवल विश्व या युग का आधार बनेगा। गुरुदेव के इसी आह्वान को बुलंद कर रहा है यह लेख!

साधारण देह-राज्य!

आइए, आपको एक साधारण व्यक्ति के देह- राज्य में ले चलते हैं। ... मेरुदण्ड के शिखर पर है- शीश ... जहाँ पर सवार रहता है- अहंकार! एक साधारण व्यक्ति के देह-राज्य का राजा है- अहंकार! अहं व्यक्ति को परमात्मा या आत्म-चेतना का आभास तक नहीं होने देता। यह ऐसा राजा है, जो 'मैं' और 'मेरा' के संविधान से देह-राज्य चलाता है।
... थोड़ा नीचे मेरुदण्ड के दूसरे स्तर की ओर देखें। यहाँ तीन उच्च-केन्द्र हैं- Medulla, Cervical और Dorsal- जिन्हें श्री योगानंद परमहंस जी ने ... 'दरबार-ए-खास' कहा है। यहाँ का प्रधानमंत्री है- 'अज्ञान'! इस प्रधानमंत्री का मंत्री-मंडल है- भौतिक इच्छाएँ, नकारात्मक भाव, बुरी ... आदि।

अब ... सबसे निचले या तीसरे स्तर की ओर देखें। यहाँ तीन निम्न केन्द्र हैं- Lumbar, Sacral और Coccygeal- जिन्हें श्री योगानंद परमहंस जी ने 'दरबार-ए-आम' कहा है। यहाँ 'मन' अपनी 'ऐन्द्रिक शक्तियों' के साथ क्रियाशील रहता है।
साधारण व्यक्ति के इस पूरे देह-तंत्र का संचालन कैसे होता है? किस एकमात्र उद्देश्य से?...

इस अहं रूपी राजा के १० राजकुमार भी हैं, जो पहले दर्जे के विलासी हैं। ये सब किसमें मदोन्मत्त हैं?...

एक साधक का देह-राज्य साधारण देह-राज्य से भिन्न कैसे कार्य करता है? ये सब पूर्णत: जानने के लिए पढ़िए जुलाई'१५ माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका...

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