आदर्श मैनेजर- श्रीराम!

ज़रा कल्पना कीजिए एक ऐसी सुबह की, जब आपकी आँख खुली और आपका मन बड़ा प्रसन्न हुआ- 'वाह! आज तो अलार्म बजने से पहले ही मेरी आँख खुल गई!' टाइम देखने के लिए अपने साथ वाली टेबल पर नज़र डाली, तो वहाँ घड़ी नहीं रखी थी क्योंकि कल रात आप वहाँ अलार्म घड़ी रखना ही भूल गए थे। अब आपने दीवार पर टंगी घड़ी में टाइम देखा। यह क्या? ८.०० बज चुके थे! अॉफिस निकलने के लिए... केवल आधा घंटा शेष। आपको याद आया कि आज तो कंपनी के मैनेजर के साथ आपकी मीटिंग है। आप हड़बड़ाकर बिस्तर से लगभग कूद ही पड़े। ब्रश करने के लिए जल्दी से बाथरूम में गए। पर आपको ब्रश होल्डर में आपका टुथब्रश ही नहीं मिला!... तो आपने शोर मचाया। तब आपका बेटा हाथ में एक नया टुथब्रश लिए भागा-भागा आपके पास आया और उसे आपको थमा कर चला गया। शुक्र है भगवान का, आखिरकार ब्रश तो मिला! पर अब जब टुथपेस्ट के लिए हाथ बढ़ाया, तो वह भी अपने स्थान पर नहीं था। इधर-उधर टटोला, तो वह वाशिंग मशीन पर रखा हुआ मिल गया। आप नहाकर पहनने के लिए कपड़े निकालने लगे तो आपकी वह कमीज़ इस्त्री नहीं थी... मन मसोस कर दूसरी कमीज़ से ही काम चलाना पड़ा, जो आप पर ज़्यादा फब नहीं रही थी। खैर! तैयार होकर आप नाश्ता करने बैठे। पर ऐन-मौके पर गैस का सिलेंडर खाली हो गया और आपकी श्रीमती जी आपको नाश्ते के लिए गरमा-गरम आलू के परांठे नहीं दे पाई। आप खाली पेट ही नाश्ते की टेबल से उठे। आपने जल्दी से अब अपनी गाड़ी निकाली... अचानक आपका ध्यान इंडिकेटर पर गया, जो पैट्रोल के रिसर्व मार्क पर फ्लैश हो रहा था। ओह! अब तो और भी देर हो जाएगी। पर और कोई उपाय भी नहीं था, इसलिए आपने अपनी गाड़ी थोड़े लम्बे रूट पर घुमा ली क्योंकि उस रास्ते पर पड़ने वाला पैट्रोल पंप अक्सर खाली मिलता है। ... पैट्रोल पंप सचमुच खाली था। पर क्यों? क्योंकि हड़ताल के कारण आज पैट्रोल पंप बंद थे। ...अब तो हद ही हो गई थी। आपने अपनी गाड़ी को वहाँ पार्क किया और दौड़ लगाई अॉटो स्टैंड की ओर। मुँह माँगा किराया देकर अॉफिस पहुँचे पर आप डेढ़ घंटा लेट थे!! 
उफ! पढ़कर ही घबराहट होने लगी। इतनी अव्यवस्था! इतनी मिस-मैनेजमेंट! और उससे इतनी सारी दिक्कतें! इसलिए चाहे घर हो, अॉफिस हो, संस्थान हो, राज्य हो या देश हो, हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े स्थान पर उचित प्रबंधन की आवश्यकता होती है। किसी भी कार्य की सफलता उसके प्रबंधन पर निर्भर करती है।
प्रबंधन कोई नया विषय नहीं है, बल्कि यह मानव-सभ्यता जितना ही पुराना है। ... एक आदर्श समाज के लिए एक आदर्श प्रबंधन की आवश्यकता होती है और आदर्श प्रबंधन के लिए एक आदर्श प्रबंधक की। जहाँ बात आदर्श प्रबंधक की हो, वहाँ भगवान श्रीराम का जीवन-चरित्र मिसाल बनकर सामने आता है। हैरान हो गए न! मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और प्रबंधन-कौशल?
... अपने सम्पूर्ण जीवन-काल में प्रभु श्रीराम ने जो-जो कार्य किए, उनको अगर बारीक दृष्टि से देखा जाए तो वहीं से आज की मैनेजमेंट की परिभाषाएँ और सिद्धान्त निकलते हुए प्रतीत होंगे। एक कुशल प्रबंधक के कौन-कौन से गुणों को भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में परिलक्षित किया, जानने के लिए पढ़िए सितम्बर माह की अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका...

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