आकस्मिक उपचार!

असावधानी या लापरवाही दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है। सावधानी से दुर्घटनाओं को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द आवश्यक उपचार मिल जाने पर मृत्यु एवं अन्य खतरों से बचाया जा सकता है। अतः इस बार अखण्ड ज्ञान आपके लिए आकस्मिक दुर्घटनाओं में की जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा के चुनिंदा सूत्र लेकर आई है।

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आग से जलना

अक्सर गृहणियाँ रसोईघर में खाना पकाते समय  अपना कोई न कोई अंग जला बैठती हैं। वहीं बच्चे भी अनजाने में शैतानी करते हुए गर्म बर्तन को छूकर या गैस की आँच के नज़दीक आकर अपने को जला लेते हैं। दिवाली पर पटाखों से जल जाना भी एक साधारण घटना है। ऐसे में, डॉक्टर तक पहुँचने से पूर्व जले व्यक्ति को क्या प्राथमिक उपचार दिया जाए ताकि उसे कम से कम नुकसान हो।आइए जानते हैं-
● जले हुए अंग को ठंडा रखना जरूरी होता है।सबसे पहले जले हुए स्थान को साफ एवं ठंडे पानी से धोएँ।संभव हो तो जले हुए स्थान को नल से धीरे-धीरे बहते पानी के नीचे रखें।आप ठंडे पानी में भीगी पट्टी भी जले स्थान पर रख सकते हैं। परन्तु ध्यान दें, घाव दबाएँ नहीं।  

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● नमक में थोड़ा पानी मिला कर पेस्ट बनाएँ। फिर उस पेस्ट को जली हुई जगह पर लगाएँ।

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● कच्चे आलू या गाजर या केले को बारीक पीसकर लगाना भी जलने में कारगर है।

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● तिल पीस कर जले स्थान पर लगाने से राहत मिलती है।

इनमें से किसी भी एक चीज़ को लगाकर साफ, गीले व न चिपकने वाले कपड़े से रुग्ण अंग को ढीला बाँध दें।इससे संक्रमण में बचाव होता है।

जलने पर होने वाली पीड़ा... क्या जले हुए के दाग को भी मिटाया जा सकता है?

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नाक, कान, आँख या गले में किसी अवान्छनीय वस्तु का चले जाना, नकसीर हो.... या चोट अथवा मोच... ऐसे में क्या प्रथमिक उपचार अपनाएँ... जानने के लिए पढ़िए अप्रैल'16 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

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