क्या आपने 'ऐसा' संगीत सुना है?

शनिवार, 18 जनवरी, 2014- सनडांस फिल्म समारोह रिलीज़ करता है- 'अलाइव इनसाइड: अ स्टोरी ऑफ म्यूज़िक एंड मेमोरी'!
सारांश- 'माइकल बेनेट' की यह डॉक्युमेंटरी संगीत के सकारात्मक और प्रभावशाली असर को दर्शाती है।यह कि कैसे अल्ज़ाइमर के रोगियों की निराश ज़िंदगी में म्यूज़िक कारगर सिद्ध हुआ। फिल्म बयान करती है कि जो काम आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के लिए असंभव सा है, उसको कितनी सहजता से संगीत सुनने मात्र से मुमकिन किया जा सकता है!
'फ्रेडरिक नीत्शू' कहते हैं, 'संगीत के बिना ज़िंदगी एक भूल है।' परन्तु अगर आज हम अपनी दृष्टि घुमाएँ, तो संगीत के कारण कितनी ही ज़िन्दगियाँ पतन की ओर खिसक रही हैं। न जाने कैसी-कैसी धुनों पर सवार हो इंसान अश्लीलता और अभद्रता का नंगा नाच कर रहा है! विचारणीय है कि फिर वह कौन सा संगीत है जो ज़िन्दगी को बिगाड़ता नहीं, संवारता है। जो व्यक्ति के व्यक्तित्व से लेकर सामाजिक स्तर में सकारात्मक प्रभाव लाता है। उपरिलिखित बॉक्स में आपने पढ़ा कि कैसे संगीत ने भूलने की बीमारी से जूझते कुछ मरीज़ों को उनकी यादों से रू-ब-रू कराया! कैसे  उनकी खोई हुई ज़िन्दगी में फिर से जान फूँक दी! ऐसे संगीत को शोधकर्ताओं की भाषा में सकारात्मक यानी 'पॉज़िटिव म्यूज़िक' कहा जाता है। आइए, इस लेख  में जानते हैं कि यह पॉज़िटिव म्यूज़िक क्या है और किस प्रकार काम करता है? क्या है इसका प्रभाव और दायरा? साथ ही यह भी कि ऐसे संगीत का स्त्रोत कहाँ है?

पॉज़िटिव म्यूज़िक का विज्ञान!

कंपन विज्ञान ( Science of Vibration) में एक सिद्धांत आता है- 'स्पंदनीय मेल' या 'सिम्पैथेटिक वाइब्रेशन' का।  इसके अनुसार पास में पड़ी किन्हीं दो वस्तुओं में से एक वस्तु कंपन करती है, तब नज़दीक पड़ी दूसरी वस्तु भी पहली वाली वस्तु की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) से ही स्पन्दित होने लगती है। जैसा कि आपने स्कूल की विज्ञान की कक्षा में देखा होगा कि जब एक 'ट्यूनिंग फोर्क' को वाइब्रेट किया जाता है, तब पास में पड़ा दूसरा ट्यूनिंग फोर्क स्वतः ही कंपित हो उठता है। ठीक यही स्पंदनीय मेल संगीत के सम्बन्ध में भी घटित होता है। संगीत के बजने से उसके आसपास के हवा के कण स्पंदित हो जाते हैं। तरंगित हुए ये कण नज़दीकी सभी वस्तुओं को स्पंदित कर देते हैं।
... शोधों द्वारा यह सिद्ध हुआ है कि पॉज़िटिव म्यूज़िक से कई रोगों, दर्द व व्यायाम की थकान को दूर किया जा सकता है। संगीत द्वारा एकाग्रता में बढ़ोतरी व अपराध दर में कमी भी लाई जा सकती है। जीन्स पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कैसे?

पूर्णतः जानने के लिए पढ़िए जून'16 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

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