दिमाग की हार्ड-डिस्क कैसे करें दुरुस्त?

प्यारे बच्चों! आपको पता है एक राज़? भगवान ने हमारे शरीर में डाटा स्टोरेज (संग्रहण) के लिए कितने गीगा बाइट्स( Giga/Tera Bytes) की हार्ड डिस्क दी है? चलिए, आपको आपकी ही भाषा में इसका जवाब देते हैं। यह हार्ड डिस्क है, हमारा मस्तिष्क। इसकी इतनी क्षमता है कि यदि यह एक डिजिटल वीडियो रिकार्डर हो, तो इसमें इतने टी.वी. सीरियल संग्रहित किए जा सकते हैं कि आप लगातार 300 सालों तक टी. वी. देख सकें।

परररर... इतनी अद्भुत क्षमता होने के बाद भी हम अक्सर यही कहते हैं- " मुझे तो परीक्षा में याद ही नहीं रहा। मैं भूल जाता हूँ।" ज़रा सोचिए! हमारे पास संग्रहण का इतना जबरदस्त इंतजाम है, फिर भी हम भूलने की बीमारी के शिकार क्यों हो जाते हैं? इसका एक कारण है- एकाग्रता का अभाव! हमारी स्मरणशक्ति का सीधा संबंध हमारी एकाग्रशक्ति से है।

तो आइए, क्यों न पहले आपकी एकाग्रता की ही जाँच कर लें? क्या आपके साथ ऐसा होता है, आप पढ़ने के लिए बैठे हैं... सामने किताब खुली हुई है... पर आप वहाँ नहीं हैं। आप या तो दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं या फिर रात को देखे गए सीरियल के सीन आपकी आँखों के आगे चल रहे हैं! यदि आपका जवाब हाँ  है, तो सावधान हो जाइए! आपकी एकाग्रता शक्ति पर खतरा मंडरा रहा है। आपको उपचार की आवश्यकता है। किंतु उपचार बताने से पहले आपकी एकाग्रता का एक और टेस्ट ले लेते हैं।

आप इस अखण्ड ज्ञान पत्रिका का पेज 20 निकालिए। अब आपको टी.वी. पर अपना पसंदीदा चैनल लगा कर शोर के बीच यह पेज पढ़ना है। वह भी इस प्रकार कि 5 मिनट में इस पेज पर लिखी सारी जानकारी आपके दिमाग में बैठ जाए। तो आपका समय शुरू होता है अब! गैट सैट गो... (5 मिनट के बाद) ... स्टाप! स्टाप! आपका समय खत्म हो गया। कितनी बातें दिमाग में बैठीं? या फिर पूरा पढ़ ही नहीं पाए? क्या बार-बार टी. वी. की तरफ आपका ध्यान जा रहा था? इस दौरान आपने यह ज़रूर अनुभव किया होगा, कैसे आसपास का शोरगुल आपका ध्यान केन्द्रित नहीं होने देता! आपकी एकाग्रता को भंग करता है।... इसलिए एकाग्रता बढ़ाने की तकनीकों को जानने के लिए पढ़िए अगस्त'16 माह की हिंदी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

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