एक-के-बाद एक या एक-साथ!

'आज का दिन आपके लिए शुभ होगा। आपको इस कार्य में सफलता मिलेगी... राहु की दशा आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसलिये यदि आप सफलता को पाना चाहते हैं, तो यह उपाय करें... यह जगह, यह नम्बर, यह रंग सफलता पाने के लिए शुभ रहेंगे...'

अक्सरां जब ऐसे वाक्य हम अपने राशिफल में देखते हैं, तो खुश हो जाते हैं। खुश हों भी क्यों न? भला कौन सफल नहीं होना चाहता? किन्तु विडम्बना यह है कि सफलता के पैमाने राशिफल में लिखे वाक्य नहीं हुआ करते। सफल व्यक्ति केवल अपने भाग्य के भरोसे नहीं बैठा करते। सफलता को प्राप्त करना पड़ता है। पर कैसे?

क्या आप जानना चाहते हैं कि सफलता प्राप्ति व उसे कायम रखने का कौन सा तरीका है, जो हर व्यक्ति के राशिफल में होता है? इसका उत्तर Reliability ( विश्वसनीयता, स्थायीता) के नियम से समझाते हैं।

दो तरह की Reliability होती है- सीरीज़ ( श्रृंखला) और पैरेलल ( समानांतर)।

सीरीज़ का उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए, आपके पास पाँच बल्ब हैं। आप इन पाँच बल्बों को लेकर एक लड़ी बनाते हैं, जिसमें एक के बाद एक बल्ब को रखते हैं। सबसे पहले पहला बल्ब, फिर दूसरा, फिर तीसरा, चौथा और पाँचवा। यानी आपकी लड़ी सीधी बनेगी।
इस क्रम में जैसे ही कोई भी एक बल्ब काम करना बंद कर देगा, वैसे ही पूरी लड़ी की रोशनी खत्म हो जाएगी। इसलिए सीरीज़ व्यवस्था को सबसे कम विश्वसनीय माना जाता है।

अब पैरेलल की बात करते हैं। इसमें बल्ब श्रृंखलावत न रखकर, समानांतर रखे जाते हैं।

इस व्यवस्था के अनुसार पूरा सिस्टम सिर्फ तभी अविश्वसनीय होगा, जब सारे के सारे बल्ब काम करना बंद कर देंगे। किसी भी एक बल्ब के काम करते रहने तक, प्रकाश मिलता रहेगा। इस प्रकार पैरेलल व्यवस्था बहुत ज़्यादा विश्वसनीय होती है।
ठीक यही सिद्धांत सफलता की राह में लागू होता है। सफलता के अनेक पैमाने, गुण और विशेषताएँ होती हैं। पर हम इन गुणों को जीवन में एक के बाद एक रखने की भूल करते हैं।इसलिए सफलता पाने या उसे दीर्घकाल तक रख पाने की संभावना बहुत कम हो जाती है। तो आवश्यकता है इन पैमानों को एक साथ अपने जीवन में धारण करने की।...

सफलता के अन्य पैमानों- समय प्रबंधन, एकाग्रता और धैर्य को विस्तारपूर्वक जानने के लिए पढ़िए अप्रैल'१७ माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका!

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