आप देखिए, ये हैं तिरुमाला की उत्तुंग पहाड़ियाँ... नैसर्गिक सौन्दर्य से सजी-धजी। ताज़गी भरी हरियाली की ओढ़नी में लिपटीं। आँखों को स्वर्ग सी अनुभूति देतीं! तिरुमाला की इस पर्वतमाला की सांतवी चोटी पर स्थित है- वेंकटेश्वर मंदिर। आँध्रप्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति में स्थापित यह भव्य मंदिर आज 'तिरुपति बाला जी' के नाम से विश्व-प्रख्यात है। यह दुनिया का सर्वाधिक दान प्राप्त करने वाला सबसे धनवान मंदिर है। बहुत महिमावान मान्यता है यहाँ की! मंदिर ही नहीं, कई एकड़ में विस्तारित इसका परिसर प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुपम नमूना है। यहाँ शीतल सरोवर है... परिमल पुष्पों से सज्जित बगीचें है। इसलिए एक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी इसकी प्रसिद्धि है।
परन्तु पाठकगणों, आज से सैंकड़ों वर्षों पूर्व ऐसा यहाँ कुछ भी नहीं था। जीर्ण-शीर्ण सा यह मंदिर उजाड़ झाड़-झंखाड़ के बीच उपेक्षित पड़ा था। जिसके इर्द-गिर्द खूंखाड जानवरों से अटे पड़े बीहड़ जंगल थे। मानव सभ्यता से दूर, इन वनों में नृशंस बलि-उपासकों कापालिकों का आतंक था। इसलिए कोई भी यहाँ फटकने का साहस नहीं करता था।
फिर किसने किया इस मंदिर का जीर्णोद्धार? भारतीय संस्कृति का यह माणिक अपनी गरिमा को कैसे प्राप्त कर पाया? इसके मूल में 'गुरु भक्त्ति का रौंगटे खड़े कर देने वाला इतिहास है। एक ऐतिहासिक गाथा, जो सृष्टि के भगवान (वेंकटेश्वर/ तिरुपति बाला जी) की आँखों में आँखें डालकर कहती है- 'पहले श्री गुरुदेव, बाद में भगवान जी आप! क्या है तिरुमाला-तिरुपति मंदिर का मार्मिक इतिहास? जानने के लिए पूर्णतः पढ़िए जुलाई'१८ माह की हिंदी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।