सुस्त कर्मचारियों को स्फूर्त कैसे बनाएँ?

कंपनियों में काम करने वाले लोगों पर, उनकी मानसिकता पर, उनके व्यवहार पर अनेक शोध हो चुके हैं। मैनेजमेंट के एक बहुत ही विख्यात प्रोफेसर हुए हैं-मेकग्रेगर। उन्होंने इन कंपनियों के कर्मचारियों पर शोध करने के दौरान दो सिद्धांत दिए, जिन्हें Theory X और Theory Y का नाम दिया। इस लेख में हम इन्हीं दो सिद्धांतों को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं। ग्रेगर इन दो सिद्धांतों के माध्यम से कंपनियों में कार्यरत लोगों के व्यवहारों, काम करने की इच्छा और उनकी महत्वकांक्षाओं के बारे में बताते हैं।

Theory X की श्रेणी वाले कर्मचारियों के विशेष लक्षण

* इन लोगों को कभी भी काम करना पसंद नहीं होता। ये हमेशा ही काम से बचने की कोशिश करते हैं।

* इनमें से अधिकतर लोग जुनूनी नहीं होते और न ही ज़िम्मेदारी लेना चाहते हैं। ...

* इनमें से बहुत से लोग यह योग्यता भी नहीं रखते कि अपनी रचनात्मकता से कम्पनी की समस्याएँ सुलझा सकें।

* इस श्रेणी के लोगों के अनुसार शारीरिक, भौतिक और सुरक्षा सम्बन्धी ज़रूरतों का पूरा होना ही सबकुछ है। ...

* ये लोग केवल अपने लिए ही सोचते अथवा काम करते हैं। ...

* ये लोग अक्सर किसी भी तरह के बदलाव के सख्त खिलाफ होते हैं।

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Theory Y की श्रेणी वाले कर्मचारियों के विशेष लक्षण

* ये लोग काम को अपना मानकर करते हैं। इसलिए इन लोगों को काम भी खेल की तरह ही लगता है।

* ये लोग स्वयं ही अच्छा कार्य करने के लिए प्रेरित रहते हैं और अपनी संस्था को बेहतरीन योगदान देना चाहते हैं।

* संस्था में गुणवत्ता और उत्पादकता को सर्वोच्च स्तर पर रखने के लिए ये लोग काम करते हैं।

* ये लोग बढ़-चढ़कर संस्था से जुड़ें सभी कार्यों में भाग लेते हैं, अपना भरपूर योगदान ...

* ये लोग संस्था में रचनात्मकता के वातावरण को ...

सो अभी तक हमने पढ़ा कि Theory X और Theory Y की श्रेणियों वाले लोगों के क्या लक्षण होते हैं। दुसरे शब्दों में रखें तो Theory Y की श्रेणी में आने वाले लोग अपनी कम्पनी और कार्य के प्रति स्वयं ही उत्साहित रहते हैं। वहीँ Theory X की श्रेणी वाले लोग केवल डंडे के ज़ोर पर कार्य करते हैं और बस अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में लगे रहते हैं।

प्रत्येक संस्था को अपने कर्मचारियों को लेकर यहीं लक्ष्य होता है कि किस प्रकार Theory X के लोगों को Theory Y की श्रेणी में लाया जाए। इसको हासिल करने के दो रास्ते हैं। ...

क्या! पूर्णतः जानने के  लिए पढ़िए दिसम्बर 2018 माह  की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

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