1. एमेज़ॉन (Amazon) का 'टू पिज्ज़ा रूल'
आजकल हंस अभी अपना सोशल सर्कल बढ़ाने में लगे हुए हैं। कभी फेसबुक से किसी को मित्रता के लिए अनुरोध (friend request) भेजते हैं, तो कभी किसी का सोशल साइट पर अनुगमन (follow) करते हुए दिखते हैं। कभी फोन पर गप-शप करते हुए दिखते हैं, तो कभी वॉट्स-एप पर ऑनलाइन मीटिंग और चैट करते दिखते हैं। अपने ऐसे जीवन को आज हमने नाम दिया हुआ है- 'द सोशल लाइफ'!
पर हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा सोशल सर्कल होने के बावजूद भी हम न खुश हैं और न ही संतुष्ट। ऐसा क्यों? आइए, हम इस 'क्यों' का उत्तर सोशल सर्कल में माने जाने वाली सबसे पसंदीदा वस्तु से जानते हैं। यह वह है जो आती चकोर डिब्बे में है, पर दिखती गोल है और ग्रहण करने के समय बन जाती त्रिकोण है। जी हाँ! हम बात कर रहे हैं, सोशल सभाओं में खाए जाने वाले फेवरेट जंक फ़ूड पिज्ज़ा की।
हालांकि पिज्ज़ा खाने की लत सेहत के लिए घोर रूप से हानिकारक है, पर एमेज़ॉन कम्पनी के सी.ई.ओ ने इसी को माध्यम बनाकर मैनेजमेंट का एक महत्वपूर्ण सूत्र दिया है- 'टू पिज्ज़ा रूल' अर्थात 'दो पिज्ज़ा नियम'!
ज़रा सोचिए, कितने लोग दो बड़े पिज्ज़ा का लुत्फ अच्छे से उठा सकते हैं? 5 से 6 लोग! इससे ज्यादा लोग अगर दो पिज्ज़ा खाते हैं, तो न तो किसी का पेट भरता है और न मन।
इसी विचारधारा को लिए है- 'टू पिज्ज़ा रूल'! दरअसल आजकल कम्पनियों में मीटिंग करने का प्रचलन खूब ज़ोरों-शोरों से शुरू हो गया है।तथ्य बताते हैं कि अमेरिका में तो रोज़ाना लगभग 11 मिलियन मीटिंग्स होती हैं। परन्तु एमेज़ॉन के सी.ई.ओ ने यह अनुभव किया की भीड़ वाली ऐसी संभव का कोई ख़ास लाभ नहीं होता। जैसे-जैसे मीटिंग में लोगों की गिनती बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे कम्पनी के उस प्रोजेक्ट का आउटपुट घटता जाता है। कहने का मतलब कि मीटिंग्स से तभी कुछ महत्वपूर्ण निर्णय आ सकते हैं, जब उनमें उपस्थित लोग उतने हो जितने दो पिज्ज़ा पेट और मन भर कर खा सकते हैं। यानी 5 से 6 लोगों की टीम। इसी को 'टू पिज्ज़ा रूल' कहा गया है।...
कैसे ये 'टू पिज्ज़ा रूल' इंसान की सोशल लाइफ पर लागू होता है?
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