खुशी की खोज

संसार में हर इंसान अपना जीवन खुशी से जीना चाहता है। चाहे भी क्यों न? हर किसी को एक खुशहाल जीवन जीने का अधिकार जो है। पर हर किसी के लिए खुशी की परिभाषा अलग-अलग होती है। कुछ दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढते हैं, तो कुछ अपने बटुए को पैसों से भरा हुआ देखकर खुश होते हैं। कुछ दोस्तों के साथ मौजमस्ती करके खुश रहते हैं, तो कुछ परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण समय बिताकर! कह सकते हैं, हर इंसान का जीवन एक तलाश है। खुशी पाने के लिए एक अनवरत खोज! इसलिए इस बार अखण्ड ज्ञान पत्रिका के इस स्तंभ में हम आपके लिए लाए हैं एक ऐसी फिल्म की कहानी, जो शायद आपने पढ़ी अथवा देखी भी हो। इस फिल्म का नाम है- 'द पर्स्युट ऑफ हैप्पीनेस (The Pursuit Of Happiness)। 

'द पर्स्युट ऑफ हैप्पीनेस' 2006 में रिलीज़ हुआ एक हॉलीवुड चलचित्र है। यह 'क्रिस गार्डनर' नामक एक व्यवसायी (Entrepreneur)   की ज़िंदगी पर आधारित एक सच्ची कहानी है। इसे 'गाब्रिएल मुकीनो' के द्वारा डायरेक्ट किया गया है। इसके मुख्य अभिनेता 'विल स्मिथ' ने 'क्रिस गार्डनर' की भूमिका निभाई है। यह फिल्म 'क्रिस गार्डनर' के जीवन के उन पड़ावों को बखूबी दर्शाती है। जिनके कारण वे गरीबी भरे बेघर जीवन से उठकर खुद की स्टॉक ब्रोकरेज फर्म खोलने में कामयाब हुए। फिल्म में दर्शायी गई 'क्रिस गार्डनर' के जीवन की इन घटनाओं को हम बारीकी से देखेंगे। साथ ही, उनकी सहायता से हम आपको मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक प्रभावों के बारे में बताएँगे, जिनके कारण 'क्रिस गार्डनर' अपने जीवन को पुनर्गठित करने में सक्षम रहे।


घटनाक्रम- 'क्रिस गार्डनर' का बचपन काफी कठिनाइयों से भरा था। क्रिस के सौतेले पिता उनकी माँ और बहनों को शराब के नशे में बहुत परेशान करते व मारा-पीटा भी करते। इसी की वजह से उनका बाल-मन भय-भाव के घावों से पीड़ित रहा। पर साथ ही, उनके जीवन में सकारात्मकता का एक सशक्त स्रोत भी था, जो उन्हें आगे चलकर एक बेहतर जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करता रहा। यह आधार, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी, वह थीं उनकी माँ।...

कैसे बदली उनकी माँ ने उनके जीवन की दिशा? क्या है इससे जुड़ा मनोवैज्ञानिक प्रयोग? इससे आगे की कहानी और उससे भी जुड़े अन्य मनोवैज्ञानिक प्रयोगों को पूर्णतः जानने के लिए पढ़िए सितंबर माह की अखण्ड ज्ञान हिन्दी मासिक पत्रिका।

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