रामचरितमानस के पात्रों से सीखें---

अमरीकी लेखक जॉन मैक्सवेल कहते हैं- 'A wise person learns from his mistakes.  A wiser one learns from others' mistakes. But the wisest person of all learns from others' successes.' अर्थात् एक बुद्धिमान व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखता है। उससे ज्यादा बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों की गलतियों से सीखता है। लेकिन सबसे बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों की सफलता से सीखता है। इसलिए आज के इस समय में जहाँ हम समस्याओं से घिरे हैं; हमारे पास समाधान का अभाव है; बहुत सारे प्रश्न हैं... हम रामचरितमानस के उन पात्रों से सीख लेंगे, जिन्होंने संघर्षों को पार कर सफलता के कीर्तिमान स्थापित किए। 

श्रीराम का वनवास, हमारा गृहनिवास!

इंसान को अपने जीवन में सबसे ज्यादा अनिश्चितता से डर लगता है। कुछ दिनों पहले तक हम स्वेच्छाओं से भरा-पूरा जीवन पूरी स्वछंदता के साथ जी रहे थे... कि एकदम से ऐसी त्रासदी आई कि हम अपनी इच्छाओं का दम घोंटकर अपने घरों में बंद रहने को विवश हो गए। क्या ऐसी अनिश्चितता के लिए हम तैयार थे? बिल्कुल नहीं! इसीलिए तो परेशान हैं।

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि फिर तो श्रीराम जी को हमसे कहीं ज्यादा परेशान हो जाना चाहिए था। जहाँ एक रात पहले उनके राजतिलक की तैयारियाँ चल रही थीं, वहीं अगले दिन प्रातः उन्हें बताया गया कि महाराज दशरथ के रानी कैकेयी को दिए वरदान के अनुसार उन्हें 14 सालों के लिए वन जाना है। राज-वैभव छोड़कर वनों का कष्टदायी जीवन व्यतीत करना है। पर ऐसे में प्रभु राम की प्रतिक्रिया क्या थी??? ...

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इतना ही नहीं, इस कोरोना महामारी से उपजी अनिश्चितता में हम एक नहीं अनेक रामचरितमानस के पात्रों से सीख ले सकते हैं, कैसे? पूर्णतः जानने के लिए पढ़िए मई'२० माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका!

 

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