चिंता की चिता जला दो!

सावधान! आजकल एक खतरनाक बीमारी बड़ी तेज़ी से फैल रही है। बच्चे, बूढ़े और जवान-  सभी इसका शिकार बन रहे हैं। आप भी एक बार नीचे लिखे इसके लक्षणों को खुद पर जाँच लें। चेक कर लें कि कहीं आप भी इस रोग से ग्रस्त तो नहीं?

• अगर मैं लोन न चुका पाया, तो?

• अगर मैं इंटरव्यू में पास न हुआ, तो?

• अगर मेरी इस बार प्रोमोशन न हुई, तो?

• अगर मैं पेपर में फेल हो गया, तो?

• अगर मेरा प्रोजेक्ट समय पर खत्म न हुआ, तो?

• अगर पापा ने बाइक लेने से मना कर दिया, तो?

• अगर मेरे बेटे का एडमिशन अच्छे स्कूल में न हुआ, तो?    

अगर... अगर... अगर...  तो? तो? तो? यदि हम यह लिखते जाएँ, तो शायद यह लिस्ट कभी खत्म नहीं होगी। 'अगर...तो' की यह लगातार चलती कड़ी एक भयंकर रोग है, जिसे कहते हैं- चिंता!

आज के विशेषज्ञ चिंता के कारणों को 'Cognitive Distortions' (संज्ञानात्मक विकृतियाँ) कहते हैं, जिन्हें विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है। …

…क्या हैं ये विभिन्न श्रेणियाँ? और कैसे इन चिंताओं के चंगुल से बाहर आया जा सकता है? इन सभी टिप्स को जानने के लिए पढ़िए नवंबर'20 माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका।

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