कभी-कभी ऐसा भी करना चाहिए…

इस माह 'सफल जीवन के सूत्र' स्तम्भ का यह लेख जिन सूत्रों की विस्तृत जानकारी आपको देगा, वे इस प्रकार हैं- ज़िन्दगी में हारना बेहद जरूरी है। साथ ही, आपको गिरना, क्रोध करना, संकोच करना और लालच करना भी आना चाहिए।

इतना ही नहीं, जेन दर्शन के कथनानुसार- जो भी करो, पूरी तरह यानी अच्छी तरह करो...। तो इसका मतलब हुआ हारो, तो पूरी तरह हारो; संकोच करने में जरा-सा भी संकोच मत करो; क्रोध भी अच्छी तरह करो; गिरो, तो शान से गिरो; लोभ भी आधा-अधूरा नहीं, बल्कि भरपूर मात्रा में करो।

चौंकिए मत! न तो आपके पढ़ने में कोई गलती हुई है, न हमारे लिखने में। बस, ठीक से समझने की जरूरत है। यह सच है कि हमारे प्रयास हमेशा ऐसे होने चाहिएँ, जो हमें जीवन में जीत दिलाते हों, ऊँचा उठना सिखाते हों, बिना किसी संकोच के मंजिल तक बढ़ना सिखाते हों, व्यवहार में शालीनता लाते हों और स्वभाव को संयमित बनाते हों।

परन्तु कभी-कभी जिन्दगी में कुछ ऐसे भी मोड़ आते हैं, जहाँ ये नकारात्मक पक्ष भी कारगर सिद्ध होते हैं। जहाँ पूरी तरह हारने पर ही जीत मिलती है; पूरी तरह संकोच करने पर ही आत्म-विश्वास आसमान को छू पाता है; अच्छी तरह क्रोध करके सबका हित हो जाता है। ज्यादा से ज्यादा नीचे गिरकर, सफलता की ऊँची से ऊँची छलांग लग जाती है और लालच करके व्यक्ति समाज को बहुत कुछ दे जाता है।...

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कैसे? पूर्णतः जानने के लिए पढ़िए जनवरी २०२१ माह की हिन्दी अखण्ड ज्ञान मासिक पत्रिका! 

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