बरगद वृक्ष से एक इंटरव्यू!

गाँव से बाहर... कुछ कोस दूरी पर... खड़ा इस है पृथ्वी का एक विशालकाय जीव- एक बरगद का वृक्ष! बहुत विशाल और विस्तारित आकार! धरा की गहराइयों में उतरी उसकी सशक्त जड़ें! अत्यन्त चौड़ा और सख्त छाल से ढका तना! उसकी शाखाओं का तो क्या कहना! बृहदाकार लम्बी भुजाओं की तरह ऐसे फैलीं कि हवा में न झूल सकीं... मुड़कर धरा में जा गड़ी, मानो भुजबल से अपने ही भीमकाय तन को सहारा दे रही हों। बड़ी विचित्रता है, इस बरगद के वृक्ष में!

इसी अद्भुतता से आकर्षित हुआ एक रिसर्च स्टूडेंट (शोधकर्ता छात्र)। उसके अनुसंधान का विषय था- 'Indian Banyan Tree and its socio-religious roles in Scientific dimension' अर्थात् 'भारतीय बरगद का वृक्ष और उसकी सामाजिक-धार्मिक भूमिकाओं का वैज्ञानिक दृष्टि से अवलोकन'। अपने इसी शोध को आयाम देने के लिए वह खिंचा चला आया इस अपूर्व विशालकाय बरगद के पास।

'वाह! क्या वैभव है, मानो वनस्पति जगत का राजा खड़ा हो!'- छात्र आह्लादित हो उठा। इसी उमंग में उसने अपने बैग से कैमरा निकाला। तरह-तरह के कोण बनाकर तड़ातड़ बरगद को तस्वीरें खींच लीं। फिर वह घूम घूम कर उत्सुक दृष्टि से बरगद को निहारता रहा। उसके मन में भाव उठा- 'हे बरगद! इस सृष्टि में एक छोटी सृष्टि हो तुम! न जाने अपने अंदर कितने रहस्यों को समेटे हुए हो! कौन बताएगा मुझे ये रहस्य? क्या मैं स्वयं समझ पाऊँगा?'

छात्र की इस भोली उत्सुकता ने जैसे वृक्ष को अनुप्राणित कर दिया।…

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