हाल ही में डी.जे.जे.एस. आरोग्य ने प्रधानमंत्री “श्री नरेंद्र मोदी जी” के द्वारा आरंभ की गई एक महत्वपूर्ण सरकारीपहल में भाग लिया, जिसे देश में “प्रकृति परीक्षण” के रूप में जाना गया। आयुष मंत्रालय का यह प्रयास, व्यक्तियोंको उनकी अद्वितीय प्रकृति के बारे में शिक्षित कर, आयुर्वेद को सबके लिए सुलभ बनाना है। आयुर्वेद के अनुसारप्रत्येक व्यक्ति के अंदर प्रकृति के तीन दोष (वात,पित्त और कफ़) पाए जाते हैं। ये दोष व्यक्ति के व्यक्तित्व औरस्वास्थ्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और प्रत्येक व्यक्ति में एक दोष तो अवश्य ही होता है, जोउनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।

22 दिसंबर 2024 को दिव्य धाम (नई दिल्ली) में एक प्रकृति परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया जोडी.जे.जे.एस. आरोग्य द्वारा “अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान” दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस शिविर में विभिन्न आयु वर्गों के लोगों ने भाग लिया जिनमें 1,146 रोगियों ने अपनी प्रकृति के बारे में जानकारीप्राप्त करने के लिए पंजीकरण कराया।। डी.जे.जे.एस. के वालंटियर्स ने उपस्थित लोगों को इस निशुल्क आयुर्वेदिकशिविर में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जहां उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अपने शरीर की सही क्षमता को जानने काअवसर मिला।
शिविर में 50 विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए समर्पित थे। इन चिकित्सकों ने रोगियों से कईसवाल पूछ कर उनका गहन मूल्यांकन किया, ताकि उनके स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की जा सके और ट्रीटमेंटप्लान पर परामर्श दिया जा सके। प्रत्येक रोगी को व्यक्तिगत आहार और जीवन शैली से संबंधित सलाह के साथ-साथ निशुल्क निदान प्राप्त हुआ, ताकि उनका स्वास्थ्य लाभ अधिकतम हो सके। पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों परआधारित इस प्रकृति परीक्षण पहल में एक व्यापक सर्वेक्षण आधारित मोबाइल एप भी शामिल किया गया। जिसेउपयोगकर्ताओं की प्रकृति निश्चित करने में सहायता के लिए डिज़ाइन किया गया था। रोगियों को यह ऐप प्रदानकिया गया, जिससे वह अपने ट्रीटमेंट प्लान देख सकते थे और भविष्य में प्रकृति परीक्षण से संबंधित सूचनाओं के बारेमें अवगत रह सकते थे। एप के माध्यम से रोगियों ने प्रशिक्षित वालंटियर्स के द्वारा सरलता से निर्देशित सर्वेक्षण पूराकिया। जिसके परिणाम स्वरुप प्रत्येक व्यक्ति को एक अनुकूलित डिजिटल प्रकृति प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुए।

शिविर का समन्वय और देखरेख, ‘शरीर विभाग’ की अडिश्नल प्रोफेसर डॉ मीरा के. भोजनी ने किया जिसमें ‘द्रव्यगुण विभाग’ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर नीहायथाची और डॉक्टर शिफा शेट्टी ने भी सहयोग प्रदान किया। प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना की और एक प्रतिभागी ने तो कहा कि - “इस शिविर ने तो मेरी आंखें ही पूरीतरह खोल दी, अब मैं अपने शरीर की संरचना और बेहतर स्वास्थ्य विकल्पों को समझने में सहायक महसूस करता हूँ”। डाॅक्टर शिफा शेट्टी ने भी टिप्पणी करते हुए कहा - “यहाँ का संगठन और उत्साह अत्यंत प्रेरणादायक है। आयुर्वेद के बारे में जानने के लिए इतने सारे लोगों को उत्साहित देखना वास्तव में सराहनीय है ”।
शिविर में शामिल वरिष्ठ डॉक्टरों ने दिव्यधाम के माहौल की प्रशंसा की और बड़े पैमाने पर हो रहे कार्यक्रम के लिएसंस्थान डी.जे.जे.एस की सराहना भी की। उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों के आने की प्रशंसा की और भविष्य मेंडी.जे.जे.एस. आरोग्य के साथ मिलकर इस प्रकार के और सफल कार्यक्रम करने की आशा भी व्यक्त की। इसकेअतिरिक्त डी.जे.जे.एस. के प्रचारकों द्वारा चिकित्सा टीम के लिए एक आध्यात्मिक वार्ता का आयोजन भी कियागया। डॉक्टरों ने कामधेनु गौशाला का दौरा किया, जो डी.जे.जे.एस. द्वारा देसी गायों की नस्लों को संरक्षित करने केलिए बनाई गई है। उन्होंने ऐसे शांत वातावरण में समय बिताने पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की।
“प्रकृति परीक्षण” आयुर्वेद के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डी.जे.जे.एस. सभी को अपनी प्रकृति का पता लगाने और स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद के ज्ञान को अपनाने के लिएप्रोत्साहित करता है।
