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स्वदेशी गाय की नस्लों व पारंपरिक मवेशी पालन प्रथाओं के महत्व को बढ़ावा देने हेतु कामधेनु गौशाला ने डी.जे.जे.एस की साझेदारी में 6 से 8 अप्रैल 2024 तक नूरमहल, पंजाब में ‘देसी गौपालन प्रशिक्षण शिविर’ का आयोजन किया। शिविर का प्राथमिक उद्देश्य प्रतिभागियों को देसी गौपालन के मूल सिद्धांतों पर शिक्षित करना था, जिसमें मुख्यता स्वदेशी गायों की नस्ल की पहचान, पोषण प्रबंधन व रोग उपचार जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) के शिष्य व डीजेजेएस प्रतिनिधि, स्वामी चिन्मयानंद जी ने भारतीय संस्कृति में निहित गाय के महत्व पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। शिविर का मुख्य आकर्षण देसी गौपालन के आर्थिक, पर्यावरणीय व सांस्कृतिक महत्व के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा, ताकि पारंपरिक मवेशी पालन प्रथाओं को अधिक से अधिक स्वीकृति प्राप्त हो सके।

Desi Gaupalan Training Camp organized by Kamdhenu Wing of DJJS reiterated the need of reviving desi Gaupalan traditions and Indigenous Cow Welfare at Nurmahal, Punjab

तीन दिवसीय शिविर में उपस्थित विभिन्न गोशालाओं के प्रतिनिधियों को देसी गौपालन प्रथाओं के लिए उपयुक्त स्वदेशी गाय की नस्लों की पहचान व चुनाव पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। स्वामी चिन्मयानंद जी ने प्राचीन परंपराओं व ग्रंथों से उद्धरण देते हुए भारतीय संस्कृति में गाय के पूजनीय पक्ष को उजागर किया। उन्होंने भारतीय समाज की संरचना में अंतर्निहित पवित्रता, मातृत्व व समृद्धि के प्रतीक रूप में गाय की पूजा पर प्रकाश डाला। 

डी.जे.जे.एस प्रतिनिधि ने प्रत्येक गाय की नस्ल से संबंधित शारीरिक व व्यवहारिक लक्षणों को समझने पर बल दिया, जिससे प्रतिभागी मवेशी अधिग्रहण के समय सही निर्णय ले पायें। उपस्थित प्रतिभागियों ने स्वदेशी मवेशियों के विशेष आहार संबंधित आवश्यकताओं का ज्ञान व स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर संतुलित आहार तैयार करने का व्यवहारिक मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। इसमें इष्टतम स्वास्थ्य और उत्पादकता सुनिश्चित करने हेतु चराई प्रविधि, पूरक आहार और आहार अनुपूरकों के उपयोग का परिज्ञान सम्मिलित था।

Desi Gaupalan Training Camp organized by Kamdhenu Wing of DJJS reiterated the need of reviving desi Gaupalan traditions and Indigenous Cow Welfare at Nurmahal, Punjab

डी.जे.जे.एस प्रतिनिधि ने पौराणिक हिन्दू कथाओं से भगवान श्री कृष्ण की गायों के परम रक्षक व पालक रूप में छवि का आह्वान किया। स्वामी जी ने भारतीय समाज में गायों के सांस्कृतिक महत्व व भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों में निहित कालातीत ज्ञान को रेखांकित किया। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से भगवान श्री कृष्ण का अनुसरण करते हुए गौ संरक्षण व कल्याण पर केंद्रित जीवन शैली अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने न केवल धार्मिक कर्तव्य के रूप में, बल्कि पर्यावरण स्थिरता व जीवन की नैतिकता को बनाए रखने हेतु भी गायों के प्रति प्रेम, सम्मान व कल्याण भाव के महत्व पर बल दिया।

शिविर में देसी गायों से संबंधित सामान्य रोगों के निवारण व उपचार पर व्यापक निर्देश भी प्रदान किए गए। इसके तहत प्रतिभागियों को विभिन्न रोगों के लक्षणों की पहचान व उनके निवारक उपायों को प्रभावी रूप से कार्यान्वित करने का ज्ञान प्रदान किया गया। देसी गायों के स्वास्थ्य की वृद्धि हेतु पारंपरिक उपचारों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।

निष्कर्षतः ‘देसी गौपालन प्रशिक्षण शिविर’ स्थायी मवेशी पालन प्रथाओं को बढ़ावा देने व स्वदेशी गाय की नस्लों के संरक्षण के लिए एक मूल्यवान मंच सिद्ध हुआ। प्रतिभागियों को आवश्यक ज्ञान व कौशल प्रदान कर शिविर ने देसी गौपालन गतिविधियों में युक्त व्यक्तियों व समुदायों के सशक्तिकरण में योगदान दिया, जिससे पारंपरिक मवेशी पालन प्रथाओं की निरंतर समृद्धि को सहयोग मिला।

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