दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की प्रेरणा से, 18 से 24 मई 2026 तक देहरादून, उत्तराखंड में सात दिवसीय भव्य ‘श्री राम कथा’ का सफल आयोजन किया गया। इस पावन आध्यात्मिक कार्यक्रम में उत्तराखंड एवं आसपास के क्षेत्रों से हज़ारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज़ की। प्रत्येक दिवस की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण एवं भक्ति भजनों से हुई, जिससे वातावरण भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।

यह कथा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी दीपिका भारती जी द्वारा अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत की गई। उनकी मधुर वाणी, गहन आध्यात्मिक दृष्टिकोण तथा भगवान राम के जीवन आदर्शों की सारगर्भित व्याख्या ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रेरक प्रसंगों, भक्ति भजनों और व्यावहारिक जीवन शिक्षाओं के माध्यम से कथा ने आज के समाज में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के संदेश की प्रासंगिकता को सुंदरता से प्रस्तुत किया।
सात दिवसीय कथा के दौरान साध्वी जी ने भगवान राम के जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करते हुए आज्ञाकारिता, सत्यनिष्ठा और धर्मपालन जैसे मूल्यों को रेखांकित किया। रावण पर विजय को उन्होंने सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक बताते हुए, रामराज्य को एक आदर्श समाज की संकल्पना के रूप में प्रस्तुत किया।

अपने संबोधन में साध्वी जी ने बताया कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक पथप्रदर्शक है, जो संतुलित, सार्थक और जागृत जीवन जीने का मार्ग दिखाता है। साध्वी जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन की प्रत्येक घटना गहन आध्यात्मिक शिक्षा से परिपूर्ण है। ‘सतगुरु’ की भूमिका पर विस्तार से बताते हुए, साध्वी जी ने कहा कि जैसे प्रभु श्रीराम ने निषादराज, शबरी, सुग्रीव, विभीषण इत्यादि को सत्य एवं मुक्ति का मार्ग दिखाया, उसी प्रकार वर्तमान युग में एक पूर्ण सतगुरु ही साधक को आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर-प्राप्ति की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंतरिक रूपांतरण तभी संभव है जब व्यक्ति आत्मिक जागृति के पथ पर चलता है।
साध्वी जी ने रावण को मानव के भीतर विद्यमान नकारात्मक प्रवृत्तियों- अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, स्वार्थ, द्वेष, इत्यादि का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आंतरिक स्तर पर प्रभु श्रीराम की विजय तब होती है जब साधक ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना अथवा धर्ममय आचरण के माध्यम से इन दोषों पर विजय प्राप्त करता है। आधुनिक जीवन की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आज का मानव तनाव, भावनात्मक असंतुलन, टूटते रिश्तों और नैतिक पतन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिसका प्रमुख कारण आध्यात्मिक मूल्यों से दूरी है। भगवान राम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा, अनुशासन और करुणा बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उनका आचरण आदर्श चरित्र को दर्शाता है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।
युवाओं को संदेश देते हुए साध्वी जी ने उन्हें नैतिक मूल्यों को अपनाने और भारतीय संस्कृति तथा आध्यात्मिकता से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने परिवारों को भी प्रेरित किया कि वे सामूहिक प्रार्थना, सकारात्मक संवाद और निःस्वार्थ सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने ज़ोर दिया कि सच्ची भक्ति केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह हमारे विचारों, वचनों और कर्मों में भी परिलक्षित हो।
कथा ने सभी को ब्रह्मज्ञान द्वारा अपने भीतर ‘राम तत्व’ को जागृत करने की प्रेरणा दी। आज दिव्य गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी यह शाश्वत ब्रह्मज्ञान जन जन को प्रदान कर रहे हैं। कार्यक्रम ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया कि जब दिव्य ज्ञान आत्मा को प्रकाशित करता है, तब जीवन शांति और शाश्वत आनंद की यात्रा बन जाता है।