दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की कृपा से, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 14 से 20 दिसम्बर, 2025 तक अहमदाबाद, गुजरात में आध्यात्मिक लाभ प्रदान करने हेतु सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कथा भागवत महापुराण के गूढ़ ज्ञान से परिपूर्ण थी, जिसने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शक बन भक्ति और धर्म के पथ को प्रकाशित किया। कथा में संगीतमय और भक्तिपूर्ण भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को शांति और अध्यात्म से सराबोर कर दिया, जिससे उपस्थित सभी साधकों की चेतना का विकास हुआ। अहमदाबाद व दूरदराज़ के क्षेत्रों से आए हज़ारों श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक अनुभव में भाग लिया।

कथा व्यास साध्वी आस्था भारती जी ने अत्यंत भावपूर्ण एवं सरल शैली में श्रीमद् भागवत कथा का वाचन किया। उन्होंने संस्कृत श्लोकों के साथ उनके गूढ़ अर्थों को भी बड़ी सरल भाषा में उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का विस्तार से वर्णन करते हुए उनकी लीलाएं, दिव्य चमत्कार, गूढ़ ज्ञान और धर्म के प्रति उनकी अडिग प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कैसे श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथी एवं आध्यात्मिक गुरु बनकर श्रीमद् भागवत गीता का दिव्य ज्ञान प्रदान किया। और फिर श्रीकृष्ण द्वारा प्राप्त इसी दिव्य ज्ञान ने अर्जुन के समस्त संशय और दुविधाओं का अंत कर उसे उसके कर्तव्य के प्रति स्पष्टता, साहस और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी बताया कि गीता के उपदेश न केवल कालातीत हैं, बल्कि आज के युग में भी प्रासंगिक हैं, जो व्यक्ति को ज्ञान, आंतरिक शांति और आत्मबोध की दिशा में मार्गदर्शित करते हैं।
आज के समय में, जहाँ जीवन भौतिक आकांक्षाओं, तनाव और विकर्षणों से घिरा है, वहाँ एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। केवल एक सच्चे गुरु ही साधक को ब्रह्मज्ञान की वह दिव्य विद्या प्रदान कर सकते हैं, जो आत्मा की मुक्ति, जन्म-मरण के चक्र से छुटकारा और परमात्मा से एकत्व का मार्ग प्रशस्त करती है। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से अब तक लाखों साधकों को यह दिव्य ज्ञान प्राप्त हो चुका है, जिन्होंने इसके माध्यम से आत्मबोध की दिशा में अपनी आध्यात्मिक यात्रा आरंभ की है। ब्रह्मज्ञान पर आधारित ध्यान विधि के नियमित अभ्यास द्वारा वे अपने भीतर के दिव्य महासागर में गोता लगाकर शाश्वत शांति, अनंत आनंद एवं स्थायी पूर्णता को प्राप्त कर रहे हैं।

यह कथा डीजेजेएस के सामाजिक प्रकल्प 'कामधेनु’ (भारतीय गो संरक्षण एवं संवर्धन) को समर्पित रही। कथा में इस बात पर बल दिया कि वास्तविक आध्यात्मिकता केवल भक्ति में ही नहीं, बल्कि सभी प्राणियों की निस्वार्थ सेवा में भी निहित है।
यह कथा न केवल आत्मचिंतन और आत्मबोध का माध्यम बनी, बल्कि ईश्वर से एकत्व की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरणा का स्रोत भी रही। कथा के अंत में साध्वी जी ने कहा कि ब्रह्मज्ञान के सच्चे जिज्ञासुओं के लिए डीजेजेएस के द्वार सदैव खुले रहेंगे। श्रद्धालुओं ने गहन आध्यात्मिक विषयों को सरल और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करने के लिए डीजेजेएस की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अनेक श्रद्धालुओं ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने में रुचि दिखाई और संस्थान के विविध सामाजिक व आध्यात्मिक अभियानों से जुड़े रहने की इच्छा व्यक्त की।