भारत का मिठास से हमेशा से गहरा नाता रहा है। मीठा खाना हमारे कल्चर, हमारी भावनाओं और हमारे त्योहारों का हिस्सा है। लेकिन, अब हमारे मीठे के शौक पर ध्यान देने और बैलेंस बनाने की ज़रूरत है। एक देश के तौर पर, हम एक बढ़ते हेल्थ संकट का सामना कर रहे हैं क्योंकि 10 में से लगभग 3 लोग इससे प्रभावित हैं और डायबिटीज़ से अक्सर 8-10 गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम होती हैं, जिसकी वजह से हम दुनिया की डायबिटीज़ कैपिटल बन गए हैं।

इसी चिंता को समझते हुए “फिट इंडिया शुगर बोर्ड पहल” की शुरुआत की गई है, जिसका उल्लेख माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 25 मई 2025 को किया था। इस पहल का संदेश है—"फिट इंडिया ही सशक्त भारत है", इसलिए स्वस्थ विकल्प चुनना आज की जरूरत है।
भारत सरकार स्कूलों में शुगर बोर्ड के ज़रिए शुगर के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मेहनत कर रही है। साथ ही, लोगों को स्मार्ट और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए इस पहल को दफ़्तरों, कैंटीनों और दूसरे संस्थानों तक पहुँचाने की भी सलाह देती है।

इस “silent epidemic” से लड़ने के लिए, इस साल भी डी.जे.जे.एस. आरोग्य ने सितंबर–अक्टूबर 2025 में "शुगर सेंस – स्वाद से सेहत तक" नाम से मधुमेह जागरूकता अभियान चलाया। इसका मक़सद है कि लोगों का ध्यान सिर्फ स्वाद की ओर न रहे, बल्कि आकर्षण से जागरूकता और स्वाद से स्वास्थ्य की ओर बढ़े।
यह अभियान जागरूकता, शिक्षा,” कम्युनिटी इंगेजमेंट और विभिन्न सेहत संबंधी गतिविधियों के माध्यम द्वारा लोगों को संपूर्ण स्वास्थ्य और बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक बनाने के लिए समर्पित है।
शुगर सेंस पहल का उद्देश्य मधुमेह से जुड़े भ्रम और डर को दूर करना और लोगों को ऐसी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे स्वस्थ जीवन जी सकें।
अभियान की विशिष्टताएँ
डी.जे.जे.एस आरोग्य पहल ने दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के स्कूलों, दफ़्तरों और कम्युनिटी में कुल 25 इंटरैक्टिव स्वास्थ्य कार्यशालाएँ आयोजित कीं।
हर सत्र में रोकथाम, सही पोषण और फिटनेस से जुड़ी उपयोगी बातें आसान भाषा में बताई गईं, ताकि स्वास्थ्य से जुड़ा ज्ञान सुलभ, समझने में आसान और अपनाने लायक बन सके।
चाहे वह बच्चों एवं उत्साह से भरी हुई कक्षाएँ हों या फिर दिव्यता से परिपूर्ण आश्रम स्थल —प्रत्येक स्थान पर हुई चर्चा ने लोगों को सोचने और अपनी आदतें बदलने के लिए प्रेरित किया। यह अभियान सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं था, बल्कि वास्तविक बदलाव लाने पर केंद्रित था।
मिलकर, हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ स्वास्थ्य सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन जाए।
अभियान की मुख्य विशेषताएँ
- अपनी शुगर को जानें: चीनी के अलग–अलग प्रकार और उनके शरीर पर असर को समझना।
- स्वास्थ्य शिविर + डॉक्टर सत्र : लोगों के लिए निःशुल्क जाँच और विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह।
- थाली का ज्ञान: हमारे पारंपरिक भोजन के द्वारा पोषण और संतुलित आहार की समझ बढ़ाना।
- आदत से सेहत तक : रोजमर्रा की अच्छी आदतों से बेहतर सेहत बनाना।
- मधुमेह – संकेत या समस्या: शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर जागरूक होना।
- शुगर बोर्ड : रचनात्मक पोस्टरों और प्रदर्शनों के माध्यम से आसान दृश्य शिक्षा।
- DIY ज़ुम्बा: मनोरंजक तरीक़े से फिटनेस को बढ़ावा देना।
मुख्य बिंदु
- जिज्ञासु बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक—इस अभियान ने हर उम्र के लोगों को जोड़ा।
- इंटरैक्टिव शुगर बोर्ड ने लोगों को बातचीत करने के लिए प्रेरित किया, और ज़ुम्बा सत्रों ने सभी के चेहरे पर मुस्कान लाकर फिटनेस को मज़ेदार बना दिया।
- इस अभियान में 3,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। उन्हें मधुमेह के शुरुआती लक्षणों के बारे में बताया गया और कई लोगों को समय रहते सही देखभाल की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली।
- पोषण से जुड़े सत्रों ने प्रतिभागियों को अपने खाने की मात्रा, रोज़ाना के आहार और जीवनशैली के बारे में सोचने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया।
अतिथि और मीडिया
इस अभियान को कई अनुभवी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपस्थिति ने और भी प्रभावशाली बना दिया। उनकी बातों और सुझावों ने लोगों का भरोसा बढ़ाया। अभियान में शामिल प्रमुख विशेषज्ञ:
- डॉ. अविनाश साओजी (मधुमेह परामर्श विशेषज्ञ, संस्थापक- प्रयास सेवनकुर एन.जी.ओ, अमरावती)
- डॉ. विश्वास (जनरल फिज़ीशियन, आगरा) और डॉ. रजनीश (बी.ई.एम.एस, सी.एम.एस., आगरा)
- डॉ. पद्मा तमांग – सी. एम.ओ., एस. जी., सी.आई.एस.एफ., इंदिरापुरम, गाज़ियाबाद
- डॉ. नरेंद्र राठौर (एम.बी.बी.एस., जोधपुर) और डॉ. डी.के.बाड़मेरा (एम.डी. मेडिसिन, जोधपुर)
इनके अलावा भी कई डॉक्टर और विशेषज्ञ इस पहल का हिस्सा बने।
इस अभियान को कई स्थानीय अख़बारों और सामुदायिक मीडिया में अच्छी कवरेज मिली, जिससे यह और ज़्यादा लोगों तक पहुँच सका।
इस अभियान के बाद लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपनी शुगर की मात्रा कम करेंगे, बेहतर आदतें अपनाएँगे और अपने परिवार व समाज में बदलाव लाने का काम भी करेंगे।
संकल्प
इस शुगर सेंस कैंपेन के ज़रिए, डी.जे.जे.एस. आरोग्य हर व्यक्ति को शुगर के स्वाद से लेकर फिटनेस तक, जागरूकता से लेकर स्वस्थ जीवन तक प्रेरित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मधुमेह-मुक्त भारत बनाने की यह यात्रा आगे भी जारी है!
