गहरे स्तर पर जड़ें जमा चुकी लैंगिक असमानताओं को दूर करने के उद्देश्य से, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) अपनी महिला सशक्तिकरण एवं लैंगिक समानता प्रकल्प 'संतुलन' के माध्यम से अक्टूबर 2025 से ग्रामीण महिलाओं एवं उनके परिवारों के सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रव्यापी अभियान 'सशक्त नारी समृद्ध परिवार' संचालित कर रहा है। इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देश के विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि में अनेक क्षेत्रीय क्लस्टरों की पहचान की गई है। इन क्लस्टरों का चयन शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक स्वायत्तता तथा लैंगिक समानता से जुड़े उन संकेतकों के आधार पर किया गया है जो महिलाओं की अपेक्षाकृत पिछड़ी स्थिति को दर्शाते हैं। चयनित प्रत्येक क्लस्टर में स्थित डीजेजेएस शाखा को अभियान के क्रियान्वयन केंद्र के रूप में निर्धारित किया गया है।

एक ओर भारतीय महिलाएँ अंतरिक्ष अभियानों का नेतृत्व कर रही हैं, लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, सशस्त्र सेनाओं में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं तथा वैश्विक कंपनियों का संचालन कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर देश के अनेक हिस्सों में आज भी महिलाओं के मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाता है, उन्हें शिक्षा से वंचित रखा जाता है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वर्ष 2024 की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट के अनुसार भारत की राष्ट्रीय साक्षरता दर (74 प्रतिशत) वैश्विक औसत (83 प्रतिशत) से पीछे है, जिसका प्रमुख कारण महिलाओं की अपेक्षाकृत कम भागीदारी है। इसके अतिरिक्त अनेक महिलाओं को अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार भी नहीं मिलता। वे आज भी लैंगिक हिंसा, लैंगिक भेदभाव तथा पुत्र-प्राथमिकता जैसी सामाजिक कुरीतियों का सामना कर रही हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में प्रति 1000 लड़कों पर क्रमशः केवल 902 और 928 लड़कियाँ होने का लिंगानुपात इस स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह गहरा विरोधाभास आज भी महिला सशक्तिकरण के मार्ग में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है।
दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक, कहते हैं, "मनुष्य का मन ही उसके जीवन का निर्माता है। हमारे विचार और हमारी अभिव्यक्तियाँ ही हमारे कर्मों का निर्माण करती हैं। समाज में गहराई तक व्याप्त लैंगिक असमानता का मूल कारण मानव मन की विकृत सोच और अस्वस्थ मानसिक संस्कार हैं।"

इस बात से प्रेरित होकर डीजेजेएस संतुलन केवल सामाजिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर आंतरिक स्तर पर परिवर्तन लाने के लिए उद्देश्यकृत है। इसका उद्देश्य उस मानसिकता को बदलना है जो लैंगिक असमानता को जन्म देती है और उसे बनाए रखती है। इसलिए इस पहल की आधारशिला आध्यात्मिक जागृति पर आधारित है। डीजेजेएस संतुलन का उद्देश्य महिलाओं को समाज में वही सम्मान और स्थान पुनः दिलाना है जिसकी कल्पना वैदिक काल में की गई थी। भारतीय प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा के सनातन ज्ञान के अनुसार आत्मसाक्षात्कार ही वह परिवर्तनकारी विज्ञान है जो महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच और व्यवहार को केवल कम नहीं करता, बल्कि उसकी जड़ों को भी समाप्त करने की क्षमता रखता है। जब चेतना परिष्कृत होती है, तब महिलाएँ अपनी अंतर्निहित शक्तियों और क्षमताओं को पहचानती हैं तथा समाज भी महिलाओं के प्रति अपनी सीमित धारणाओं और पूर्वाग्रहों से मुक्त होने लगता है।
डीजेजेएस संतुलन की वैश्विक प्रमुख एवं हिंदी तथा अंग्रेज़ी भाषा में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त श्रीराम कथावाचक साध्वी दीपिका भारती जी कहती हैं, "ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि वे केवल कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही नहीं हैं, बल्कि उनका सशक्तिकरण समाज और राष्ट्र के व्यापक सामाजिक एवं आर्थिक विकास का भी प्रमुख आधार है।"
इस अभियान का लक्षित वर्ग सभी आयु वर्ग की महिलाएँ हैं। उनके साथ कार्यशालाओं, सामुदायिक संवाद, परामर्श सत्रों तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया जाता है। इन सत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता, डिजिटल साक्षरता, नेतृत्व विकास आदि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाती है। प्रतिभागियों को भारतीय इतिहास की प्रेरणादायी विभूतियों जैसे रानी पद्मिनी, राजमाता जीजाबाई, संत कवयित्री मीराबाई, रानी मदालसा तथा रानी सुनीति के जीवन प्रसंगों से भी परिचित कराया जाता है। इन प्रेरक कथाओं के माध्यम से महिलाओं को यह अनुभव कराया जाता है कि वही साहस, विवेक, धैर्य और नेतृत्व क्षमता उनके भीतर भी विद्यमान है जिसने इतिहास में परिवारों, समाज और राष्ट्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन सभी सत्रों का संचालन डीजेजेएस की विभिन्न शाखाओं की साध्वी प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है।
स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है कि इन कार्यक्रमों में भाग लेने वाली महिला लाभार्थियों में अपनी क्षमताओं और प्रतिभाओं के प्रति जागरूकता निरंतर बढ़ रही है। वे अब अपने स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यक्तिगत विकास को पारिवारिक जिम्मेदारियों के विरोध में नहीं, बल्कि परिवार के समग्र कल्याण के लिए आवश्यक मानने लगी हैं। उनके भीतर यह समझ विकसित हो रही है कि परिवार की समृद्धि और समाज की प्रगति महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण तथा उनकी सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) एक सामाजिक एवं आध्यात्मिक संगठन है, जो शांति, सद्भाव और विश्व बंधुत्व को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। अपने नौ प्रमुख सामाजिक प्रकल्पों के माध्यम से यह संगठन समाज के प्रत्येक वर्ग के समग्र विकास हेतु निरंतर कार्यरत है। इन्हीं प्रमुख पहलों में से एक है 'संतुलन', जो डीजेजेएस की महिला सशक्तिकरण एवं लैंगिक समानता पहल है। जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण के लिए संचालित अपने प्रभावशाली अभियानों तथा निरंतर प्रयासों के कारण संतुलन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान और सराहनाएँ प्राप्त हुई हैं।
आज संतुलन भारत की अग्रणी महिला सशक्तिकरण पहलों में से एक के रूप में स्थापित हो चुका है। लगभग 70,000 निस्वार्थ महिला स्वयंसेविकाओं तथा 6,000 डीजेजेएस साध्वी प्रतिनिधियों के सहयोग से यह परियोजना महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव और हिंसा को समाप्त करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। पिछले दो दशकों में इसके विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 6,50,000 महिला लाभार्थियों तक सकारात्मक प्रभाव पहुँचा है। संतुलन केवल पारंपरिक अर्थों में महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मजागरण के माध्यम से महिलाओं के आध्यात्मिक पक्ष को जागृत कर 21वीं सदी की वैदिक नारी के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
कॉरपोरेट सेमिनारों, लाइव वेबिनारों, शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित कार्यशालाओं, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों, जनजागरूकता अभियानों, सहभागितापूर्ण सामुदायिक परियोजनाओं, रोड शो तथा बड़े स्तर की जनसंपर्क रैलियों के माध्यम से संतुलन भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सार्थक जनजागरण और सामाजिक परिवर्तन का कार्य कर रहा है। इसके कार्यक्रमों ने अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों तथा कॉरपोरेट संगठनों में गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ी है।
संतुलन के प्रयास केवल जमीनी स्तर तक सीमित नहीं हैं। अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से @DJJSSantulan विश्वभर की महिलाओं को जागरूक, प्रेरित तथा आत्मविकास के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इस बढ़ते हुए जनआंदोलन का हिस्सा बनने तथा नियमित जानकारी प्राप्त करने के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर @DJJSSantulan को फॉलो करें।
