भगवत गीता पवित्र ज्ञान का भंडार है जो कि भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि इसमे मानव जीवन की सभी जटिलताओं का समाधान है। गीता जयंती इस पवित्र ज्ञान से लाभान्वित होने का उत्सव है।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा स्थानीय गंगानगर जेल मे 18 दिसम्बर को गीता जयंती के उपलक्ष्य मे संस्थान द्वारा संचालित बंदी सुधार परियोजना अंतर्क्रांति के तहत आध्यात्मिक प्रवचन व भजन संकीर्तन का कार्यक्रम 2 घंटे चला ।
सर्वप्रथम जेल अधीक्षक अशोक वर्मा, स्वामी धीरानंद व पूर्ण चंद घोडेला ने दीप प्रज्वलित किया। कार्याक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना द्वारा किया गया। साध्वी सोनिया भारती व साध्वी सुयशा भारती ने समधुर भजनों का गायन किया। जिससे सुनने वालो के मन अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्हे इस आध्यात्मिक प्रवचनों को ग्रहण करने की इच्छा हुई।
भगवत गीता भगवान कृष्ण और उनके शिष्य अर्जुन के बीच आत्म ज्ञान के ऊपर संवाद है जो मानवमन की हर समस्या को हल करने की सामर्थ्य रखती है । स्वामी धीरानंद ने अपने प्रवचनों मे कहा कि श्रीमद भगवत गीता एक अनमोल ग्रन्थ है । आज का युवा इसकी शिक्षाओं को ज़िन्दगी के अन्तिम समय मे याद करने के लिए छोड़ देता हैं । जबकि गीता की शिक्षाएँ आज भी मानव मन की हर समस्या को हर स्तर पर हल करने मे समर्थ है ।
कार्याक्रम के अन्त मे 175 पुरुष कैदी व 15 स्त्री कैदियो ने गीता की आरती मे भाग लिया । अन्त मे अशोक वर्माजी ने कैदियो के उत्थान मे क्रियारत अंतरक्रान्ति के विभिनन प्रयासों जैसे कैदियो के विचारों में परिवर्तन, उनका सुधार एवं उनका पुनर्वास की सराहना की । उन्होंने समधुर भजनो और विचारों के लिए संस्थान के बन्धुओं का धन्यवाद किया ।

