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पीस प्रोग्राम ने 6 नवंबर 2025 को कॉन्फ्रेंस रूम 1, डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, 15, जनपथ, नई दिल्ली में गीता-ओ-लॉजी वर्कशॉप “योगस्थः कुरु कर्माणि, नॉट माइंड-फुल, बट माइंडफुल एक्शन” का आयोजन किया। डालमिया भारत लिमिटेड के 90 टॉप-लेवल प्रोफेशनल्स ने इस वर्कशॉप में हिस्सा लिया।

भगवद गीता में बताए गए लाइफ़ लेसन्स के प्रैक्टिकल एप्लिकेशंस पर आधारित इस वर्कशॉप में अपने कर्म पर फोकस और बैलेंस बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया। अतः कर्मयोग कॉन्सेप्ट का विवरण इसमें खास था।

साध्वी तपेश्वरी भारती जी, प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर, पीस प्रोग्राम और साध्वी डॉ. निधि भारती जी, को-प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर, पीस प्रोग्राम ने एक्टिविटीज़ और डेमोंस्ट्रेशंस के साथ इनसाइटफुल सेशंस कंडक्ट किए। उन्होंने तीन लेवल्स - बॉडी, माइंड और सोल - पर ज़रूरी एन्हांसमेंट्स पर ज़ोर दिया।

बॉडी लेवल पर, पार्टिसिपेंट्स को माइंडफुल ब्रीदिंग, ईटिंग, और मूवमेंट के ज़रिए माइंडफुलनेस बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। इससे आध्यात्मिक विकास के साथ शारीरिक कल्याण में सामंजस्य स्थापित करने में मदद मिलती है।

माइंड लेवल पर, बंदर के समान अराजक विचारों को नियंत्रित करने, कर्म के घावों को भरने, और अपनी आभा या व्यक्तित्व को सुंदर बनाने के लिए तकनीकों को साझा किया गया।

सोल लेवल पर, न्यूटन के थ्री लॉज़ ऑफ़ मोशन को कर्म से संबोधित करते हुए समझाया गया एवं गीता की शिक्षाओं की व्याख्या की गई। प्रतिभागियों ने इंपल्सिव बिहेवियर से बचने और अनासक्त उत्कृष्टता के साथ कर्म करने की आवश्यकता को भी जाना।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस वर्कशॉप का उद्देश्य ब्रह्मज्ञान की थर्ड आई मैडिटेशन के महत्व को रेखांकित करना था जो तीनों लेवल्स पर संतुलन प्राप्त करने और मेंटल क्लैरिटी पाने में मदद करता है। यह भगवद गीता द्वारा दिया गया मुख्य संदेश है।

इस वर्कशॉप में समग्र दृष्टिकोण गहराई से प्रतिध्वनित हुआ, जो आज की मॉडर्न दुनिया में गीता की प्रासंगिकता को दर्शाता है।

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